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मोदी सरकार ने एनएसजी कमांडो को वीआईपी सुरक्षा से हटाने का फैसला क्यों लिया है? जानिए

Thursday, 16 Jan 2020 12:00:54 PM

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एनएसजी की सुरक्षा उत्तर प्रदेश की पूर्व सीएम मायावती, मुलायम सिंह यादव, चंद्रबाबू नायडू, प्रकाश सिंह बादल, फारूक अब्दुल्ला, असम के सीएम सर्बानंद सोनोवाल, भाजपा नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री एलके आडवाणी को भी मिली हुई है. राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) को अपना ध्यान मूल काम, आतंकवाद को रोकना, विमान अपहरण के खिलाफ अभियान पर केंद्रित करना चाहिए और वीआईपी सुरक्षा के काम की जिम्मेदारी उसकी सीमित व विशिष्ट क्षमताओं पर बोझ साबित हो रहा था.

जेड-प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त 13 उच्च जोखिम वाले वीआईपी को यह बल सुरक्षा देता है. इस सुरक्षा घेरे में हर वीआईपी के साथ अत्याधुनिक हथियारों से लैस करीब दो दर्जन कमांडो होते हैं. सुरक्षा संस्था के अधिकारियों ने पीटीआई को बताया, NSG की सुरक्षा ड्यूटी को जल्द ही अर्धसैनिक बलों को सौंप दिया जाएगा. देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी एनएसजी ही सुरक्षा प्रदान करता है.

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गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा (SPG Security) हटाने और वीआईपी सुरक्षा में कटौती करने के बाद मोदी सरकार ने अब एनएसजी कमांडो (NSG Commando) को इस काम से पूरी तरह मुक्त करने का फैसला किया है. इसकी जानकारी आधिकारिक सूत्रों ने दी. दो दशक बाद ऐसा होगा कि आतंकवाद निरोधी विशिष्ट बल के ब्लैक कैट कमांडो को वीआईपी सुरक्षा ड्यूटी से हटा दिया जाएगा. इस बल का जब 1984 में गठन हुआ था, तब इसके मूल कामों में वीआईपी सुरक्षा शामिल नहीं थीं.

नेताओं की सुरक्षा NSG पर बोझ

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गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक एनएसजी का मुख्य काम एंटी टेरर ऑपरेशन और विमान हाइजैक जैसी घटनाओं को रोकना है. लेकिन विशिष्ट लोगों को सुरक्षा देना इस सीमित और स्पेशल फोर्स पर बोझ की तरह है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से यह फैसला लिया है. अधिकारी ने बताया कि इस फैसले के बाद अब एनएसजी के करीब 450 कमांडोज वीआईपी को सुरक्षा देने से मुफ्त हो जाएंगे और उन्हें फोर्स के मूल काम पर लगाया जा सकेगा.

सुरक्षा कवर से हटने के बाद देश में मौजूद एनएसजी के पांच ठिकानों पर इनकी तैनाती की जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर वहां से इनकी सेवाएं ली जा सकें. सरकार की योजना के मुताबिक वीआईपी लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF और CRPF जैसे अर्धसैनिक बलों को दी जा सकती है जो पहले ही करीब 130 हाई प्रोफाइल लोगों की सुरक्षा में तैनात हैं।

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