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बेटी सना गांगुली के सियासी पोस्ट से सौरभ गांगुली बैकफुट पर

Thursday, 19 Dec 2019 10:07:56 PM

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सियासी रथ पर सवार दुनिया के सबसे अमीर खेल संस्था यानी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष बने पूर्व भारतीय कप्तान सौरभ गांगुली को उनकी बेटी सना गांगुली ने परेशानी में डाल दिया है. सौरभ गांगुली के अध्यक्ष बनने की अलग कहानी है. इस बात की चर्चा तब भी थी और अब सौरभ की सफाई की वजह से फिर से कहा जाने लगा है कि बीसीसीआई की कुर्सी उन्हें गृह मंत्री अमित शाह ने दिलवाई है. अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद ही दूसरा खेमा पस्त पड़ा था और अचानक सौरभ गांगुली अध्यक्ष और अमित शाह के बेटे जय शाह बीसीसीआई के सचिव बन गए. तब सौरभ गांगुली के भाजपा ने जाने की चर्चा भी खूब हुई थी. बाद में सौरभ को सफाई देनी पड़ी थी. अब बेटी सना गांगुली के पोस्ट ने उन्हें फिर से बैकफुट पर ढकेल दिया है.

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर जामिया के छात्रों के साथ पुलिस की मारपीट का मामला देशभर में जंगल की आग की तरह फैल गया है. लोग अपना विरोध जता रहे हैं. इन सब के बीच बीसीसीआई अध्यक्ष सौरभ गांगुली की बेटी सना गांगुली की एक इंस्टाग्राम स्टोरी भी चर्चा बटोर रही है. सौरभ गांगुली ने भी सना की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए सना को ऐसे मुद्दों से दूर रखने की अपील की है.

Third party image reference

नागरिकता कानून के विरोध में अपनी बेटी के किए पोस्ट को लेकर सौरभ गांगुली ने सफाई पेश की है. उन्होंने कहा कि उनकी बेटी अभी छोटी है, उसे राजनीति से दूर रखें. गांगुली ने कहा कि कृपया सना को इन सभी मुद्दों से दूर रखें. यह पोस्ट सच नहीं है. राजनीति के बारे में कुछ भी जानने के लिए वह बहुत छोटी लड़की है. दरअसल सना ने कथित तौर पर लेखक खुशवंत सिंह की किताब के अंश के माध्यम से देश में मौजूदा हालत पर निशाना साधा है और अपना विरोध जताया है.

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हालांकि अब उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर यह पोस्ट नहीं दिख रही है. लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट का स्क्रीन शॉट काफी वायरल हो रहा है. 2003 में खुशवंत सिंह की किताब 'द एंड आफ इंडिया' प्रकाशित हुई थी. वायरल पोस्ट के मुताबिक इस किताब के जो अंश सना ने साझा किए हैं. उसमें लिखा है कि हर फासीवाद शासन को अपने आदेशों का पालन करने के लिए समुदाय और समूहों की जरूरत होती है. लेकिन यह यहीं पर नहीं रुकता. घृणा के आधार पर तैयार आंदोलन डर और संघर्ष दिखाकर ही आगे बढ़ाया जा सकता है.

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इंस्टाग्राम स्टोरी में आगे लिखा है कि हम में से जिसे यह लग रहा है कि वे सुरक्षित हैं क्योंकि हम मुसलिम या ईसाई नहीं हैं. वे बेवकूफी भरी दुनिया में जी रहे हैं. संघ ने अभी से ही वामपंथी इतिहासकारों और पश्चिमी सभ्यता पसंद करने वाले युवाओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. कल वे उन महिलाओं के खिलाफ होंगे, जो स्कर्ट पहनती हैं, उन लोग के खिलाफ जो मीट खाते हैं, शराब पीते हैं, विदेशी फिल्में देखते हैं और वार्षिक अनुष्ठान में मंदिर नहीं जाते. वे लोग जो दंत मंजन की जगह टूथपेस्ट का प्रयोग करते हैं, वैध के पास जाने के बजाय एलोपैथिक डॉक्टर से इलाज कराते हैं. जय श्री राम के नारे लगाने के बजाय किस या हाथ मिलाते हैं. अगर हमें भारत को जिंदा रखना है, तो यह चीजें समझनी होंगी. उन्होंने लिखा कि नफरत के आधार पर शुरू हुआ आंदोलन, भय और संघर्ष के माहौल के बने रहने तक ही चलता है. आज के समय में जो यह सोचकर खुद को महफूज मान रहे हैं कि वो मुसलमान नहीं हैं, वो मूर्खों की दुनिया में हैं.

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लेकिन सौरभ गांगुली की सफाई पर और भी प्रतिक्रिया आई. ट्विटर पर सना गांगुली ट्रेंड हुईं और टाप पर रहीं. सौरभ ने ट्विटर पर बेटी के बयान पर सफाई दी तो लोगों ने उन्हें ट्रोल किया और सवाल किया कि अठारह साल की उम्र छोटी कैसे होती है. अठारह साल में देश के युवाओं को वोट देने का अधिकार मिल जाता है. लोगों ने कहा कि दादा आपकी बेटी आपसे ज्यादा समझदार है. जाहिर है कि सत्ता और सियासत की बैसाखी के सहारे आज जिस पद पर सौरभ हैं, उनके लिए देश के इस सियासी माहौल में बेटी की प्रतिक्रिया ने उन्हें असहज कर डाला है. ट्विटर पर तो उन्हें यह सुझाव भी दिया गया है कि आपके नेतृत्व क्षमता का मैं कायल रहा हूं, उसका असर आपकी बेटी पर भी है, उन्हें रोकें मत बोलने दें. ट्विटर यूजर ने सौरभ को ट्रोल भी किया है. हालांकि देश की मौजूदा सियासी हालात पर बड़े और दिग्गज क्रिकेट खिलाड़ियों की चुप्पी पर सवाल तो खड़े हो ही रहे हैं. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).

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