समुंदर के बीच में कृत्रिम द्वीप कैसे बनाए जाते हैं, जान रह जाएंगे दंग

Monday, 29 Jun 2020 12:39:06 PM


नई दिल्ली। चीन भारत को हर तरफ से घेरना चाहता है. इसलिए लक्षद्वीप से मात्र 600 किलोमीटर की दूरी पर चीन एक कृत्रिम द्वीप का निर्माण कर रहा है. इसका खुलासा हाल ही में हुआ है. ये चीन का एक पुराना विस्तारवादी तरीका है. जिसमें वह समुद्र के बीच में मलबा भर कर कृत्रिम द्वीप बनाता है और अपनी सीमा का विस्तार करता है. इसके पहले भी चीन इस तरह की हरकतें कर चुका है। आज कृत्रिम द्वीप लोकप्रिय हो गए है और आधुनिक तकनीक के रूप में देखे जाते हैं लेकिन इनका इतिहास बहुत समय पहले है। यहां तक कि प्राचीन मिस्र की सभ्यता में भी इसका इस्तेमाल किया गया थाI


17 वीं शताब्दी में इनका उपयोग तेल की खोज और उत्पादन प्लेटफार्मों, तटीय रक्षा और भूमि आधार के व्यापक उपयोग के लिए किया गया है। जापान ने 1000 वर्ग किमी की गिनती के आसपास कई कृत्रिम द्वीप का निर्माण किया है। समुद्र में दिखनेवाले कृत्रिम द्वीप ऐसे द्वीप है जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा गठित होने के बजाय मनुष्यों द्वारा निर्मित किये जाते हैं . इस तरह के द्वीपों को निर्माण मौजूदा प्राकृतिक द्वीपों का विस्तार करके , समुद्र में मौजूद रिफ पर निर्माण करके या कई प्राकृतिक द्वीपों को एक बड़े द्वीप में समाहित करके किया जाता हैं इस प्रकार, वे आकार में व्यापक रूप से भिन्न होते हैंI,

विभिन्न प्रयोजनों के लिए कृत्रिम द्वीपों का निर्माण किया जाता है। अतीत में, कुछ द्वीप को औपचारिक संरचनाओं के लिए बनाया गया था, और अन्य द्वीपों का उद्देश्य लोगों के एक समूह को दूसरे से अलग करना था। अब वे शहरी क्षेत्रों में भीड़भाड़ को कम करने, हवाई अड्डों को समायोजित करने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बनाए जाते हैं। इसके अलावा, तटीय क्षरण को कम करने या अक्षय ऊर्जा स्रोतों से विद्युत शक्ति उत्पन्न करने के लिए द्वीपों के निर्माण के प्रस्ताव हैं।लेकिन प्रत्येक,कृत्रिम द्वीप परियोजना बेहद महंगी है और संभवतः पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है।

प्रारंभिक कृत्रिम द्वीपों में शांत पानी में तैरने वाली संरचनाएं और उथले पानी में खड़ी लकड़ी या मेगालिथिक संरचनाएं शामिल थीं I अब कृत्रिम द्वीपों का निर्माण आमतौर पर समुद्रके भूमि के पुनर्ग्रहण द्वारा किया जाता है, भूमि पुनर्ग्रहण एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें महासागरों, नदी तल और झील के बिस्तरों से नई भूमि बनाई जाती है।ऐसे जमीनको पुनर्ग्रहण मैदान कहा जाता है। बहुधा कृत्रिम द्वीप देशके समुद्र तट के नजदीक हिस्सें में बनाए जाते हैं क्योंकी तट के क्षेत्र ज्यादा गहरा नहीं होता जिससे वहाँ कृत्रिम द्वीप निर्माण के लिए जो बांध काम करना पड़ता होता हैं वो आसानीसे कर सकते हैं। लेकिन आजकल तकनीक इतनी विशाल रूप से विकसित हो गई है कि अब 75 मीटर की गहराई में कृत्रिम द्वीपों का निर्माण भी संभव है।

कृत्रिम द्वीप निर्माण की प्रक्रिया उस क्षेत्र के आधार पर निर्भरहोती हैं जिस क्षेत्र में वे बनाए जाते हैं और इस कारण सभी द्वीपों की निर्माण प्रक्रिया थोड़ी भिन्न-भिन्न हो सकती है । इसमें आमतौर पर 3 मुख्य चरण होते हैं: १ सी बेड याने समुद्री तल का भरण या बॉटम द्विप तयार करनेके लिए ठीक करना २. उसकी सीमा तैयार करना और चुने हुए जगह भरण करना पानी के स्तर पर एक मजबूत और कठोर बिस्तर की तैयारी कृत्रिम द्वीप के निर्माण में प्रमुख कदम है। समुद्र बिस्तर की शीर्ष ढीली मिट्टी की ड्रेजिंग के बाद कठोर स्ट्रैटा पाया जाता है, ज़हासे द्वीप निर्माण का कार्य शुरू होता हैं।

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