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वर्ष 1992 का एक ऐसा घोटाला जिसने देश की अर्थव्यवस्था को हिला दिया था

Thursday, 23 Jan 2020 10:32:25 AM

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हर्षद मेहता के 1550 स्कॉवर फीट के सी फेसिंग पेंट हाउस से लेकर उनकी मंहगी गाड़ियों के शौक तक सबने उन्हें एक सेलिब्रिटी बना दिया था।

हर्षद मेहता, 1980 -90 के दशक में स्टॉक मार्केट का वो बेताज बादशाह जिसने स्ट़ॉक मार्केट की दशा ही बदल डाली। मगर किसे पता था, जिसे स्टॉक मार्केट अपना मसीहा मान बैठा है, जिसे शेयर होल्डर अपनी किस्मत की चाभी समझ रहा है वो एक बड़ा घोटालेबाज जो उनहे बरबादी के जहन्नुम में ले जाकर पटक देगा। जी, हरशद मेहता वो नाम है जिसने इस देश में 4000 करोड़ का घोटाला किया, या यू कहें कि ये शख्स देश के तमाम शेयर होल्डरस के सपने और उनके चार हजार करोड़ गबन कर गया।

कौन है हरशद मेहता, क्या था उसका घोटाला, किस तरीके से इस शख्स ने देश के तमाम शेयर होलडर को लगाया 4000 करोड़ का चूना और आखिर कैसे हुई उसकी मौत।

कौन है हर्षद मेहता ?

29 जुलाई 1954 को पनेल मोटी , राजकोट गुजरात में हर्षद मेहता का जन्म एक छोटे से बिजनेस मैन परिवार में हुआ। हर्षद मेहता का बचपन मुंबई के कांदि वली में गुजरा औऱ मुंबई के होली क्रॉस बेरोन बाजार सेकेंडरी स्कूल से उन्होंने स्कूली पढ़ाई की। बारहवीं पास करने के बाद हर्षद मेहता ने लाजपत राय कॉलेज से ब ही.कॉम की पढ़ाई की फिर अगले आठ साल तक छोटी छोटी नौकरियां की। 1976 में बी कॉम पास करने के बाद हर्षद ने पहली नौकरी न्यू इंडिया अश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में बतौर सेल्स पर्सन की और उसी व्कत उनका इंटरेस्ट शेयर मार्केट की तरफ जागा औऱ उन्होंने नौकरी छोड़ हरिजीवनदास नेमीदास सिक्योरिटीज नाम की ब्रोक्रेज फर्म में बतौर जॉबर नौकरी ज्वॉइन कर ली और प्रसन्न परिजीवनदास को अपना गुरु मान लिया।

प्रसन्न परिजीवनदास के साथ काम करते हुए हर्षद मेहता ने स्टॉक मार्केट के हर पैंतरे सीखे औऱ 1984 में खुद की ग्रो मोर रीसर्स एंड असेट मैनेजमेंट नाम की कंपनी की शुरुआत की और और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में बतौर ब्रोकर मेंबरशिप ली। और यहां से शुरू हुआ स्टॉक मार्केट के उस बेताज बादशाह का सफर जिसे आगे चलकर स्टॉक मार्केट अमिताभ अमिताभ बच्न औऱ रेजिंग बुल कहा जाने लगा।

क्या था हर्षद मेहता घोटाला

बैंकिंग सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर हर्षद मेहता ने बैंकिंग लेनदेन में गोलमाल किया था. सुचेता दलाल ने उस वक्त के अपने लेख में बताया था कि हर्षद मेहता का यह फर्जीवाड़ा कैसे काम करता है.

हर्षद मेहता रेडी फॉरवर्ड (आरएफ) डील के जरिए बैंकों से फंड उठाते थे. आरएफ डील के मायने शॉर्ट टर्म लोन से है. बैंकों को जब शॉर्ट टर्म फंड की जरूरत पड़ती है तो वे इस तरह का लोन लेते हैं. इस तरह का लोन कम से कम 15 दिनों के लिए होता है.

इसमें एक बैंक सरकारी बॉन्ड गिरवी रखकर दूसरे बैंकों को उधार देते हैं. रकम वापस करने के बाद बैंक अपना बॉन्ड दोबारा खरीद सकते हैं. इस तरह के लेनदेन में बैंक असल में सरकारी बॉन्ड का लेनदेन नहीं करते हैं. बल्कि बैंक रसीद जारी करते थे. इसमें होता ये है कि जिस बैंक को कैश की जरूरत होती है वह बैंक रसीद जारी करता था. यह हुंडी की तरह होता था. इसके बदले में बैंक लोन देते हैं.

दो बैंकों के बीच यह लेनदेन बिचौलियों के जरिए किया जाता है. मेहता को इस तरह के लेनदेन की बारीकियों की जानकारी थी. बस फिर क्या! हर्षद मेहता ने अपनी पहचान का फायदा उठाते हुए हेरफेर करके पैसे लिए. फिर इसी पैसे को बाजार में लगाकर जबरदस्त मुनाफा कमाया.

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उस दौरान शेयर बाजार में हर दिन चढ़ रहा था. कुछ जानकारोंं का यह भी कहना है कि तब आंख बंद करके किसी भी शेयर में पैसा लगाने का मतलब प्रॉफिट ही होता था. बाजार की इस तेजी का फायदा उठाने के लिए ही हर्षद मेहता ने हेरफेर किया.

1990 के दशक में हर्षद मेहता की कंपनी में बड़े इवेस्टर पैसा लगाने लगे थे, मगर जिस वजह से हर्षद मेहता का नाम स्टॉक मार्केट में छाया वो एसीसी यानी एसोसिएटेड सीमेंट कंपनी में उनका पैसा लगाना शुरू किया। हर्षद मेहता के एसीसी के पैसा लगाने के बाद मानो एसीसी के भाग्य ही बदल गए, क्योंकी एसीसी का जो शेयर 200 रुपये का था उसकी कीमत कुछ ही समय में 9000 हो गई। 1990 तक आते आते हर्षद मेहता का नाम हर बड़े अखबार, मैगजीन के कवर पेस पर आए दिन आने लगा। स्टॉक मार्केट में हर्षद मेहता का नाम बड़े अदब से लिया जाने लगा।

हर्षद मेहता के 1550 स्कॉवर फीट के सी फेसिंग पेंट हाउस से लेकर उनकी मंहगी गाड़ियों के शौक तक सबने उन्हें एक सेलिब्रिटी बना दिया था। ऐसा पहली बार हो रहा था कि कोई छोटा सा ब्रोकर लगातार इतना इंवेस्ट कर रहा है और हर इवेस्टमेंट के साथ करोड़ों कमा रहा है। बस इसी सवाल ने हर्षद मेहता के अच्छे दिनों को बुरे दिनों में तब्दील कर दिया। सवाल था कि आखिर हर्षद मेहता इतना पैसा कहां से ला रहा है?

1992 में हर्षद मेहता के इस राज से टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार सुचेता दलाल ने इस राज का पर्दाफाश किया। सुचेता दलाल ने बताया कि हर्षद मेहता बैंक से एक 15 दिन का लोन लेता था और उसे स्टॉक मार्केट में लगा देता था। साथ ही 15 दिन के भीतर वो बैंक को मुनाफे के साथ पैसा लौटा देता था। मगर कोई भी 15 दिन के लिए लोन नहीं देता, मगर हर्षद मेहता बैंच से दिन का लोन लेता था।

हर्षद मेहता एक बैंक से फेक बीआर बनावाता जिसके बाद उसे दूसरे बैंक से भी आराम से पैसा मिल जाता था। हालांकि इसका खुलासा होने के बाद सभी बैंक ने उससे अपने पैसे वापस मागने शुरू कर दिए। खुलासा होने के बाद मेहता के ऊपर 72 क्रमिनर चार्ज लगाए गए और लगभग सिविल केस फाइल हुए।

स्टॉक्स में लगाने के लिए कहां से आता था पैसा?

हर्षद मेहता बाजार में ज्यादा से ज्यादा पैसा लगाकर मुनाफा कमाना चाहते थे. लिहाजा उन्होंने जाली बैंकिंग रसीद जारी करवाई. इसके लिए उन्होंने दो छोटे-छोटे बैंकों को हथियार बनाया. बैंक ऑफ कराड और मेट्रोपॉलिटन को-ऑपरेटिव बैंक में अपनी अच्छी जानपहचान का फायदा उठाकर हर्षद मेहता बैंक रसीद जारी करवाते थे.

इन्ही रसीद के बदले पैसा उठाकर वह शेयर बाजार में लगाते थे. इससे वह इंट्रा डे में प्रॉफिट कमाकर बैंकों को उनका पैसा लौटा देते थे. जब तक शेयर बाजार चढ़ता रहा, किसी को इसकी भनक नहीं पड़ी. लेकिन बाजार में गिरावट के बाद जब वह बैंकों का पैसा 15 दिन के भीतर नहीं लौटा पाए, उनकी पोल खुल गई. हर्षद मेहता के करतूतों का खुलासा होने के बाद ही शेयर बाजार के लिए रेगुलेटर की कमी महसूस हुई. इसी के बाद मार्केट रेगुलेटर सेबी का गठन हुआ.

हालांकि इन सब के बावजूद हर्षद मेहता का मन नहीं माना, वो अखबारों में एडवाइजरी कॉलम्स लिखने लगा कि आप इस कंपनी में इंवेस्ट करे आपको फायदा होगा या इस कंपनी में ना करें इससे नुकसान होगा। बाद में पता चला कि मेहता सिर्फ उस कंपनी में पैसा लगाने कि एडवाइस देता था जिसमें उसका खुद का पैसा लगा हुआ है।

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प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव पर लगाया घोटाले का आरोप

हरशद मेहता ने 1993 में पूर्व प्रधानमंत्री और उस व्कत कांग्रेस के अध्यक्ष पी वी नरसकिम्हा राव पर केस से बचाने के लिए 1 करोड़ घूस लेने का आरोप लागया था। हालांकि कांग्रेस द्वारा इसे सिरे से खारिज कर दिया गया था।

अर्श से फर्श तक का सफर

हर्षद मेहता अपने जमाने के मशहूर स्टॉक ब्रॉकर थे. उनके बारे में कहा जाता है कि वह सिर्फ 40 रुपए लेकर मुंबई आए थे और कुछ साल के भीतर ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सबसे कामयाब ब्रोकर बन गए. अपने जमाने में उनके पास एक से बढ़कर एक कारें थी. एक चपरासी के बेटे की यह कामयाबी लोगों के लिए किसी कहानी से कम नहीं थी. लेकिन अप्रैल 1992 में हर्षद मेहता का खेल खत्म हो गया.

रहस्यमई मौत

उन पर 72 आपराधिक मामले और 600 से ज्यादा दीवानी मामले थे. मगर उसे मात्र 1 केस में दोषी पाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने उसे दोषी पाते हुए 5 साल की सजा और 25000 रुपये का जुर्माना ठोका था। मेहता थाणे जेल मनें बंद था। 31 दिसंबर 2001 को देर रात उसे छाटी में दर्द की शिकायत हुई जिसके बाद उसे ठाणे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसकी मौत हो गई।

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