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विदेशों में, विश्वविद्यालयों में छात्रों को संस्कृत क्यों सिखाई जा रही है? आप भी जानिए

Tuesday, 21 Jan 2020 03:56:11 PM

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पश्चिमी जगत केवल संस्कृत ही नहीं, बल्कि बहुतेरी पुरातन भारतीय विरासत में दिलचस्पी लेता रहा है । शीर्ष मनोवैज्ञानिक कार्ल यूँग कलकत्ता के काली मंदिर में कुंडलिनी सीख चुके हैं और स्विट्जरलैंड में कुंडलिनी योग पर उनका लेक्चर 90 साल पहले हाउस फुल हो गया था। योग भारत से पहले विदेशों में जन मानस तक पहुँचा। और जब योग बरास्ते यूरोप अमेरिका इम्पोर्ट हो भारत पहुंचा योगा हो कर, तो सुपरहिट हो गया।

यह एक कड़वी सच्चाई है, जिससे हम आँख चुराते रहे हैं।

बहरहाल, संस्कृत , भारोपीय (Indo European) भाषा परिवार की प्राचीनतम भाषायों में से एक है, जिसके कारण विदेशों में लोगों की इस ओर रुचि बढ़ी है। लेकिन यह दिलचस्पी आज की नहीं है, तकरीबन 250 साल पहले से है। यह अलग बात है कि, हमें यह बात आज पता चली है। इस 250 साल वाली बात पर, बाद में।पहले भाषा परिवार को समझ लें

विश्व में तकरीबन 6500 भाषाएँ बोली जाती हैं जो 145 के आसपास भाषा परिवारों में विभक्त हैं।

इंडो यूरोपियन भाषा परिवार इसमें सबसे बड़ा है और विश्व के 46% लोगों द्वारा बोला जाता है प्राचीन काल में इंडो यूरोपियन भाषा परिवार की सारी भाषाएँ भौगोलिक रूप से एक दूसरे से जुड़ी हुई थीं यथा आधुनिक अंग्रेज़ी जर्मन ग्रीक लैटिन आर्मेनियन फारसी उर्दू , पश्तो , डारी जो नीचे के मानचित्र से स्पष्ट होगा । फारसी उर्दू पश्तो और डारी भले ही अरबी लिपि में लिखी जाए लेकिन ये अरबी भाषा परिवार semitic सेमेटिक से नहीं जुड़ी हैं बल्कि इंडो यूरोपियन की उपशाखा इंडो ईरानियन से जुड़ी हैं.

Third party image reference

ऊपर चित्र में स्पष्ट है, हरे रंग की भारोपीय (Indo European) भाषा परिवार - मेजॉरिटी लैंग्वेज के रूप में सबसे ज्यादा बोली जाती है।

भारत (हिंदी और संस्कृत आधारित अन्य भाषाएँ )

पाकिस्तान (ऊर्दू)

अफगानिस्तान ( पश्तो)

ईरान ( फारसी )

सब भारोपीय (Indo European) भाषा परिवार की शाखा - इंडो ईरानियन में आते हैं।

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  1. 18 वीं शताब्दी के पहले तक, ग्रीक को प्राचीनतम भाषा माना जाता था, परंतु संस्कृत अध्ययन के पश्चात, 2 फरवरी 1786 के अपने आख्यान में पप प्रख्यात ओरिएंटलिस्ट और एशियाटिक सोसाइटी के संस्थापक सर विलियम जोंस ने संस्कृत को ग्रीक से ज्यादा पूर्ण और लैटिन से ज्यादा विस्तृत बताया। यह सुन सब चौंक उठे। तब से अचानक विश्व की रुचि संस्कृत में हो गई।
  2. साथ ही सबसे पुराना ग्रंथ भी संस्कृत में है (ऋग्वेद - तकरीबन 1500 BC) । ग्रीक ग्रंथ 800 BC के आसपास के हैं ।
  3. प्राचीन संस्कृत का पुराना स्वरूप अभी भी बरकरार है , जिसे वैदिक संस्कृत कहते हैं -बनिस्बत लौकिक संस्कृत जो अभी प्रयुक्त होती है। सो पुरातत्व वादियों को तुरंत 2500 - 3500 साले पहले का अहसास मिल जाता है।

इन कारणों से संस्कृत, काफी लोग विदेशो में भी पढ़ रहे हैं और सिखाई जा रही है।

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