ताइवान, हॉन्ग-कॉन्ग पर ड्रैगन की टेढ़ी नजर, क्वाड देशों की बैठक से बढ़ेंगी चीन की मुश्किलें?

Friday, 05 Mar 2021 08:18:49 PM

दुनियाभर में चीन द्वारा बढ़ाए जा रहे तनाव के बीच क्वाड ग्रुप के चारों देश- भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान- इंडो पैसिफिक रीजन में शांति, समृद्धि और स्थिरता लाने के लिए एक साथ काम करने को लेकर इस महीने मुलाकात करेंगे। यह ऐलान ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने शुक्रवार को किया। चारों देशों के अहम नेताओं के बीच होने वाली यह मुलाकात चीन की उन हरकतों के बाद होने जा रही है, जब वह ताइवान, हॉन्ग-कॉन्ग पर अपनी पकड़ मजबूत करने में लगा हुआ है। इसके अलावा, बीजिंग और तेइपे के बीच हाई-स्पीड रेलवे और एक्सप्रेस-वे बना रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि चारों देशों के प्रमुख नेताओं के साथ आने की वजह से चीन के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं।

क्वाड देशों की यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की राजनयिक और सुरक्षा पहल के तहत पहली बातचीत होगी। पिछले महीने चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने सरकार के प्रमुखों की इस बैठक से पहले मुलाकात की थी। सुरक्षा संबंधों को संस्थागत रूप देने के कुछ महीनों के बाद ही बाइडन प्रशासन ने पहला क्वाड शिखर सम्मेलन आयोजित करने का कदम उठाया है। बाइडन प्रशासन ने अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वह चीन पर अपनी रणनीति के हिस्से के रूप में साझेदारी को मजबूत करने के लिए क्वाड सदस्यों सहित अन्य देशों के साथ मिलकर काम करेगा। इसमें क्वाड देशों के बीच एंटी चीन मंच के रूप में साझेदारी को मजबूत करना शामिल है। चारों देश यूएनएससी में पी -5 और भारत को एक गैर-स्थायी सदस्य के रूप में यूएनएससी में अपनी स्थिति को व्यक्त करने के लिए समन्वय करेगी, और भविष्य में सामान्य हितों के जरिए से एक आर्थिक मंच बनाने पर गौर करेंगे।

नई दिल्ली में चीन पर नजर रखने वालों ने कहा कि क्वाड की होने वाली इस बैठक से पहले पिछले कुछ दिन और हफ्ते काफी महत्वपूर्ण थे, क्योंकि बीजिंग ने यह साफ कर दिया था कि वह हॉन्ग-कॉन्ग, ताइवान और साउथ चाइना सी पर अपना नियंत्रण मजबूत करने और अपने पदचिन्हों को पूरा करने का इरादा रखता है। चीन साउथ चाइना सी पर अपना दावा करता है, जिसकी वजह से कई पड़ोसियों के साथ विवाद रहता है। ऐसे में भारतीय अधिकारी भी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अप्रोच में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। पिछले कुछ समय से भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर काफी तनावपूर्ण माहौल रहा है। बीते वर्ष जून महीने में गलवान में हुई हिंसा के दौरान, भारत के 20 जवान भी शहीद हो गए थे। वहीं, चीन के भी कई सैनिक मारे गए थे।

पिछले महीने, दोनों देशों ने आखिरकार सीमा के एक हिस्से से अपने सैनिकों को हटाने का फैसला किया। लेकिन चीन गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स और डेपसांग सहित वास्तविक नियंत्रण रेखा के अन्य हिस्सों में सैनिकों के लिए यह सहमति बनाने के लिए कम से कम उत्साही दिखाई देता है। इसी दौरान, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा दो भारतीय राज्यों, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के नजदीक तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की भी घटनाएं सामने आई हैं।