FATF में फिर उठा एक बड़ा सवाल, पाक ने पर्ल के हत्‍यारों को क्‍यों बचाया...?

Tuesday, 23 Feb 2021 12:48:27 PM

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पीएम इमरान खान बेहद मुश्किल में हैं। इसका एक बड़ा कारण फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की वित्तीय बैठक है। एफएटीएफ की इस आभासी बैठक में पाकिस्तान समेत कई देशों को ग्रे लिस्ट से बाहर करने या उन्हें ब्लैकलिस्ट में शामिल करने का फैसला लिया जा सकता है। क्या चीन और तुर्की इस बार भी पाकिस्तान को बचा पाएंगे। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पूरा विपक्ष इमरान सरकार के खिलाफ एकजुट है। एफएटीएफ की पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई इमरान सरकार को और मुश्किल बना रही है। खासकर तब जब पाकिस्तान पूरी तरह से आर्थिक रूप से तंग हो रहा है। पर्ल के हत्यारों की रिहाई का मामला भी उनकी राह में एक बड़ी बाधा बन सकता है। इस बैठक में एक बड़ा सवाल यह भी होगा कि पाकिस्तान ने अब तक जेयूडी-जैश के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की है।

सोमवार को फ्रांस की राजधानी पेरिस में शुरू हुई फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की बैठक में डैनियल पर्ल के हत्यारों की रिहाई का एक नया मामला सामने आया है। जिस तरह से पाकिस्तानी अदालत ने अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल के हत्यारों को राहत दी है उससे उनकी मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। पर्ल की हत्या के आरोपों से बरी होने के लिए अंतर्राष्ट्रीय जगत में पाकिस्तान की निंदा की गई थी। पर्ल के हत्यारों को बरी करने के फैसले पर इमरान की सरकार को अमेरिका सहित कई यूरोपीय देशों ने कड़ी चेतावनी दी थी। इसके कारण पाकिस्तान को पर्ल के हत्यारों को रिहा करने के मामले में बैकफुट पर आना पड़ा।



पर्ल के अलावा, एफएटीएफ को इस बात की पुख्ता जानकारी है कि पाकिस्तानी सरकार ने अब तक खूंखार आतंकवादी संगठन जैश-ए-मुहम्मद और जेयूडी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। उपरोक्त दोनों आतंकवादी संगठन बिना किसी डर के पाकिस्तान की जमीन पर काम कर रहे हैं। इससे पहले अमेरिका ने भी पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि उसे अपने देश में आतंकवादी संगठनों को शरण देना बंद करना होगा। संगठन को भारत में कई आतंकवादी हमलों के लिए दोषी ठहराया गया है। जनवरी 2002 में, पाकिस्तानी सरकार द्वारा दबाव में इसे प्रतिबंधित कर दिया गया था, लेकिन जैश-ए-मुहम्मद अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए इसका नाम बदल रहा है। पाकिस्तान का यह प्रतिबंध सिर्फ दिखावा था।