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क्या मोदी सरकार एयर इंडिया को बेचने में सफल हो पाएगी? आप भी जानिए

Saturday, 15 Feb 2020 12:00:33 PM

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  • विजय माल्या का कर्ज लगभग 9000 करोड़ है। और इसके ऋण का बड़ा उन्होंने किंगफिशर एयरलाइन (जो बंद हो गया ) चलाने के लिए लिया था।
  • जेट एयरवेज पर 8000 करोड़ से अधिक का कर्ज है और इसलिए जेट एयरवेज बंद हो गया है।
  • एयर इंडिया का अनुमानित कुल कर्ज लगभग 60,000 करोड़ है। हाल के दशकों में एयर इंडिया को 35,000 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।

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पिछली सरकार “जानबूझकर” (आरोप साबित नहीं हुई) एयर इंडिया को ऐसा चलाया कि एयर इंडिया नुकसान हो और विदेशी कंपनियों को फायदा हो। संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों को कई द्विपक्षीय उड़ान के अधिकार दिए गए थे, एयर इंडिया के कुछ लाभदायक मार्गों को बंद कर दिया गया था और प्राइवेट एयरलाइंस को दे दिया गया और एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस को उचित तालमेल आदि के बिना विलय कर दिया गया था। और फिर मोदी सरकार भी एयर इंडिया की छवि बदलने और सही संचालन करने में विफल रही। जितने अधिक दिन सरकार एयर इंडिया को चलाएगी उतना पैसा डूबेगा। अगर एयर इंडिया नहीं बिकता है तो भारतीय करदाताओं को सालाना हजारों करोड़ का नुकसान होगा।

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लेकिन एयर इंडिया की बिक्री भी एक आसान प्रक्रिया नहीं है। पिछली बार एयर इंडिया बिकी नहीं लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार इस बार कमर कस लिया है कि इस बार एयर इंडिया को बेच देंगे। इस बार सरकार ने एयर इंडिया के कुल ऋण का लगभग 60-70% अपने नाम पर लिया है (जिसका अर्थ है कि भारत एयर इंडिया के 70% ऋण का भुगतान करेगा)। क्योंकि कोई भी एयर इंडिया को उसके भारी ऋण के साथ नहीं खरीदेगा। एयर इंडिया को बंद करना एक विकल्प नहीं है क्योंकि यह भारतीय जनता की भावनाओं को प्रभावित करेगा और भारतीय विमानन क्षेत्र में एक खाली जगह हो जायेगा।

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वाजपेयी सरकार के दौरान अगर एयर इंडिया बेची जाती, तो भारत को अच्छी कमाई होती और हमें इतना बड़ा नुकसान नहीं उठाना पड़ता। मैं एयर इंडिया में विनिवेश का समर्थन करता हूं क्योंकि यह भारतीय करदाताओं और भारतीय यात्रियों के लिए अच्छा होगा (एयर इंडिया को छोड़कर किसी भी भारतीय एयरलाइन के पास लम्बी दूरी का विमान नहीं है)। 2020 में एक सरकार को विमानन क्षेत्र में एक खिलाड़ी बन कर नहीं रहना चाहिए। समय कि निजी कंपनियों को एयरलाइन चलाने दें। अगर एयर इंडिया को बेचने के बाद और नुकसान यह कंपनी का पैसा डूबेगा और कम से कम भारतीय करदाताओं का पैसा तो सालाना नहीं डूबेगा।

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