किसानों के लिए कृषि बिल कितने फायदेमंद हैं? यहां वह सब कुछ है जो आपको जानना चाहिए

Saturday, 19 Sep 2020 02:03:04 PM

इन दिनों लोक सभा में पारित तीन कृषि बिलों पर राजनीति तेज हो गई है। विपक्ष मोदी सरकार पर तीखे हमले कर रहा है और बिलों का विरोध कर रहा है। यह जानना बहुत जरूरी है कि ये बिल क्या हैं और इनका किसानों पर क्या असर होगा।

वास्तव में, विपक्ष इस मुद्दे पर आरोप लगा रहा है कि सरकार एपीएमसी अधिनियम को समाप्त करना चाहती है। तो चलिए यहाँ से शुरू करते हैं: -

1960-70 के आसपास, देश में कांग्रेस सरकार के पास एक कानून सार्वजनिक था, जिसे "एपीएमसी अधिनियम" कहा जाता था। अधिनियम ने किसान को केवल सरकार द्वारा तय की गई जगह, यानी सरकारी मंडी में अपनी फसल बेचने की अनुमति दी। कानून के अनुसार, किसान मंडी के बाहर अपनी फसल नहीं बेच सकता है। और इस मंडी में कृषि उपज की खरीद भी उस व्यापारी द्वारा की जा सकती है जो अधिनियम में पंजीकृत है। इन पंजीकृत व्यक्तियों को आम भाषा में "कमीशन एजेंट" कहा जाता है।


अब, नए बिल निम्नलिखित बदलाव लाएंगे-

1. अब किसान अपनी फसल को मंडी के अंदर बेच सकता है, लेकिन उसे मंडी के बाहर भी फसल बेचने की अनुमति दी गई है।
2. अब किसान की उपज को कोई भी व्यक्ति खरीद सकता है जिसके पास पैन कार्ड है।
3. अब, अगर फसल को मंडी के बाहर बेचा जाता है, तो राज्य सरकार किसान से कोई कर नहीं वसूल सकती है।
4. अब किसान अपनी उपज को राज्य के किसी भी व्यक्ति को बेच सकता है।
5. साथ ही, किसान अब कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कर सकेगा, अर्थात, किसान पूर्व निर्धारित मूल्य पर फसल बेच सकेगा।

आइए अब देखते हैं कि किन चीजों पर चुनाव लड़ा जा रहा है: -

-क्या सरकार मंडियों को खत्म कर रही है?
बिल के मुताबिक, सरकार ने मंडियों को खत्म नहीं किया। मंडी तो रहेगी, लेकिन अब किसान ने एक विकल्प दिया है कि अगर उसे सही दाम मिले तो वह अपनी फसल को कहीं भी बेच सकता है। मंडी और बाहर की मंडी में भी।

-क्या सरकार एमएसपी को खत्म कर रही है?
बिल के मुताबिक, एमएसपी खत्म नहीं हो रहा है। इसके तहत जो अनाज पहले आया था, वह अब भी इसके अंतर्गत आएगा।

-क्या सरकार पूंजीपतियों को फायदा पहुंचा रही है?
बिल के अनुसार, किसान अपनी उपज के खरीदार का फैसला करेगा, चाहे वह किसी का भी बेचे और वह जिस कीमत पर बेचे।