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गाड़ी के लिए सबसे बढ़िया टायर किस कंपनी का आता है

Friday, 24 Jan 2020 02:18:29 PM

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कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसी मशीन के अंदर बंद हैं और खुद को पेटी से बाँध रखा जो स्टील और काँच के पिंजरे जैसी है और जिसे वेल्डिंग से जोड़ा गया है। आपके आस-पास ऐसे डिब्बे हैं जो तेज़ाब और जल्दी आग पकड़नेवाले द्रव्यों से पूरी तरह भरे हैं। अब इस बहुत ही खतरनाक मशीन को ज़मीन से कुछ इंच की ऊँचाई देते हुए 30 मीटर प्रति सेंकड की तेज़ रफ्तार से दौड़ाइए। इतना ही नहीं, अपनी इस मशीन को इसी रफ्तार के साथ ऐसी ही दूसरी मशीनों के बीच दौड़ाइए जो आपके आस-पास हैं और कुछ पूरी रफ्तार से सामने से आ रही हैं!

दरअसल, जब भी आप अपनी गाड़ी चलाते हैं, तो आप ठीक यही करते हैं। गाड़ी चलाते वक्‍त, क्या चीज़ आपको बेफिक्र होकर उसे काबू में रखने में मदद देती है? काफी हद तक यह काम आपके टायर करते हैं।

टायर चुनना

अगर आपके पास गाड़ी है, तो शायद नए टायर चुनने की मुश्‍किल आपके सामने खड़ी हो। आप यह कैसे पता लगाएँगे कि कब आपको टायर बदलना है? आपको समय-समय पर टायर का मुआयना करके देखना होगा कि क्या उसके घिसने या नष्ट होने के कुछ निशान हैं।

टायर-उत्पादक, टायर में ही ऐसे इंडिकेटर बनाते हैं जिन्हें अकसर वियर बार्स्‌ कहा जाता है। इनसे पता चलता है कि टायर अब और ज़्यादा दिन नहीं चलेंगे। वियर बार्स्‌, रबर से बनी सख्त पट्टियों की तरह होते हैं और यह ट्रैड (यानी टायर के ऊपरी भाग) की सतह पर चौड़ाई में लगे होते हैं। इसके अलावा, यह भी जाँच करना अच्छा होगा कि कहीं ट्रैड उतर तो नहीं आया है, तार (बीड्‌स) तो नहीं निकल आए हैं, या फिर टायर का किनारा या साइडवॉल उठा हुआ तो नहीं है, या क्या कुछ और खराबी तो नहीं है। अगर आपके टायर में ऐसी कोई भी समस्या नज़र आए, तो आपको तब तक गाड़ी नहीं चलानी चाहिए जब तक टायर की मरम्मत नहीं होती या आप उसे बदल नहीं देते। अगर आपने नए टायर खरीदे थे और अब खराब होने की वजह से इन्हें बदलने की ज़रूरत है, तो जिस दुकान से इन्हें खरीदा था, वही दुकान शायद आपके लिए कम दाम में दूसरा नया टायर दे दे, बशर्ते यह वारंटी में लिखा हो।

टायर बदलने का सबसे बढ़िया तरीका है, एक ही किस्म के और एक ही धुरी पर लगे दो टायरों को एक-साथ बदलना। अगर आप सिर्फ एक नया टायर चढ़ाते हैं, तो जिस टायर के ट्रैड ज़्यादा नहीं घिसे हैं, उसके साथ मेल बिठाने की कोशिश कीजिए ताकि ब्रेक लगाते वक्‍त दोनों में बराबर कर्षण हो।

अलग-अलग किस्म, आकार और मॉडल के टायरों की जाँच करके चुनाव करने में एक इंसान का सिर चकरा सकता है। मगर खुद से कुछ ज़रूरी सवाल पूछने पर यह काम आपके लिए आसान हो जाएगा। पहले, आपके गाड़ी-उत्पादक ने जैसे टायर लेने की सलाह दी है, उस पर विचार कीजिए। आपकी गाड़ी की कुछ खासियतें होती हैं जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है, जैसे कि टायर और पहियों का आकार कैसा है, गाड़ी का निचला हिस्सा ज़मीन से कितना ऊपर उ ठा होना चाहिए, और आपकी गाड़ी ज़्यादा-से-ज़्यादा कितना वज़न झेल सकती है।

गाड़ी के डिज़ाइन पर भी ध्यान देना ज़रूरी है। नए ज़माने की गाड़ियों में ऐन्टीलॉक ब्रेक्स (जिससे गीले या बर्फीले रास्ते पर टायर घूमते रहते और नहीं फिसलते), ट्रैक्शन कन्ट्रोल (यह टायरों को फिसलने से रोकता है) और ऑल-व्हील-ड्राइव सिस्टम (यह चारों टायरों तक ऊर्जा पहुँचाता है) होते हैं और इनके लिए खास किस्म के टायरों की ज़रूरत होती है। आपकी गाड़ी के लिए कैसे टायर ठीक होंगे, इस बारे में खास हिदायतें आम तौर पर गाड़ी के मालिक के मैनुअल में दी जाती हैं।टायर

चुनते वक्‍त यह भी याद रखना है कि आप कैसे रास्ते पर गाड़ी चलाते हैं। आप ज़्यादातर कच्ची सड़कों पर गाड़ी चलाते हैं या पक्की सड़कों पर, बरसात में या गर्मियों में? आप शायद अलग-अलग हालात में गाड़ी चलाते होंगे। तो फिर आपको ऐसे टायरों की ज़रूरत होगी जो हर तरह के रास्ते पर चल सकें (all-terrain) और हर तरह का मौसम (all-season) झेल सकें।टायर के टिकाऊपन और उसके ट्रैक्शन के हिसाब से वह किस श्रेणी में आता है, आपको इस बात पर भी गौर करना चाहिए। आम तौर पर, टायर का ट्रैड जितना नरम होगा, उसमें उतना ही ट्रैक्शन होगा, मगर वह जल्दी घिस जाएगा। दूसरी तरफ, अगर ट्रैड काफी सख्त हैं, तो टायर में कम ट्रैक्शन होगा और वह ज़्यादा दिन तक चलेगा। कौन-से टायर किस श्रेणी में आते हैं, इसकी जानकारी टायर की दुकान से मिलनेवाली पत्रिका में दी जाती है। लेकिन इस बात का भी ध्यान रखिए कि अलग-अलग उत्पादक अपने हिसाब से टायर को अलग-अलग श्रेणी में रखते हैं।

इन सारी बातों को मद्देनज़र रखते हुए जब आपके सामने चुनाव के लिए कुछ ही टायर रह जाते हैं, तो अब आप कीमत के हिसाब से अपना फैसला कर सकते हैं। अकसर जाने-माने उत्पादक बढ़िया क्वालिटी के टायर पेश करते हैं और ऐसी वारंटी देते हैं जिसमें बहुत-से फायदे होते हैं।

अपने टायर की देखभाल

टायर की अच्छी देखभाल में तीन बातें शामिल हैं: हवा का सही दबाव (air pressure) बनाए रखना, नियमित रूप से चारों टायरों की आपस में अदला-बदली करना (rotate) और उनमें सही ताल-मेल बनाए रखने के साथ-साथ उन्हें सीधा रखना (alignment). टायर में हवा का सही दबाव बनाए रखना निहायत ज़रूरी है। अगर टायर में ज़्यादा हवा होगी, तो ट्रैड के बीच का हिस्सा जल्दी घिस जाएगा। दूसरी तरफ, अगर टायर में हवा का दबाव बहुत कम होगा, तो उसका किनारा बहुत ज़्यादा घिस जाएगा और इंधन फिज़ूल में खर्च होगा।

एक महीने में, टायर से आधा किलो या उससे ज़्यादा हवा का दबाव घट सकता है, और ऐसा रबर से हवा निकलने (air bleeding) की वजह से होता है। इसलिए यह मत सोचिए कि आप अपने टायर का आकार देखकर पता लगा लेंगे कि उसमें ठीक से हवा भरी है या नहीं। रबर उत्पादकों के संघ के मुताबिक, “हो सकता है कि एक टायर, हवा का लगभग आधा दबाव खोने के बाद भी चपटा नज़र न आए!” इसलिए टायर का दबाव नापने के लिए प्रेशर गैज का इस्तेमाल कीजिए और ऐसी जाँच महीने में कम-से-कम एक बार ज़रूर कीजिए।

बहुत-से लोग यह गैज अपनी गाड़ी में सामने की तरफ, ग्लव कम्पार्टमेंट में रखते हैं ताकि वे जब चाहें, उसे निकालकर इस्तेमाल कर सकें। जब भी आप इंजन का तेल बदलते हैं, तो टायरों की जाँच ज़रूर कीजिए। और उस वक्‍त भी जब वे ठंडे पड़ जाते हैं, दूसरे शब्दों में कहे तो जब गाड़ी कम-से-कम तीन घंटे बिना चले एक ही जगह पर खड़ी हो या जब उसने 1.5 किलोमीटर से भी कम दूरी तय की हो। टायर में हवा का दबाव कितना होना चाहिए, यह अकसर गाड़ी के मालिक के मैनुअल में लिखा होता है, या ड्राइवर की सीट के पास दरवाज़े पर या फिर ग्लव कम्पार्टमेंट में चिपके लेबल पर होता है। टायर की एक तरफ यह लिखा होता है कि उसमें ज़्यादा-से-ज़्यादा कितनी हवा भरनी चाहिए। इसलिए अगर आप झटकेदार सफर से बचना चाहते हैं, तो उससे कम हवा भरिए।

अगर आप नियमित रूप से टायरों की आपस में अदला-बदली करेंगे, तो वे लंबे समय तक चलेंगे और बराबर घिसेंगे। अगर आपके गाड़ी उत्पादक ने आपको नहीं बताया है कि आपको कितने समय बाद टायरों की अदला-बदली करनी होगी, तो अच्छा होगा कि आप हर 10,000 से 13,000 किलोमीटर के सफर के बाद ऐसा करें। मगर हाँ, उन्हें किस दिशा में बदलना है, यह जानने के लिए गाड़ी के मालिक का मैनुअल देखिए।

एक आखिरी बात, आपके टायर सीधे हैं या नहीं, इसकी जाँच साल में एक बार करवाइए या फिर तब जब गाड़ी चलाते वक्‍त आपको कुछ ज़्यादा ही कंपन महसूस हो या गाड़ी घुमाने में मुश्‍किल हो। हालाँकि गाड़ी का सस्पेनशन सिस्टम इस तरह बनाया जाता है कि अलग-अलग वज़न उठाते समय भी टायर सीधे रहते हैं, फिर भी रोज़ाना घिसने के कारण समय-समय पर इनकी जाँच करवाना और इन्हें सीधा करना ज़रूरी हो जाता है। मोटरगाड़ी मरम्मत करनेवाला ऐसा टेक्नीशियन, जिसके पास सस्पेनशन सिस्टम की मरम्मत करने और चक्के को सीधा करने का लाइसेंस हो, वह आपकी गाड़ी को ठीक से सीधा कर पाएगा जिससे टायर लंबे समय तक, आराम से चल सकें।

“समझदार” टायर

कुछ गाड़ियों में ऐसे कंप्यूटर लगे होते हैं, जो टायर का दबाव ज़्यादा घटने पर ड्राइवरों को सावधान करते हैं। कुछ ऐसे भी टायर होते हैं जिनमें हवा का दबाव खत्म होने पर भी वे बिना किसी खतरे के कुछ समय चल सकते हैं और कुछ टायर, पंक्चर होने पर अपने आप छेद को बंद कर देते हैं। जी हाँ, आज इंजीनियर एक-से-एक बढ़िया टायर बना रहे हैं जो तरह-तरह के हालात में चल सकते हैं।

आजकल के टायर नयी-नयी चीज़ों से तैयार किए जाते हैं, और ट्रैड डिज़ाइन, सस्पेंशन, स्टेरिंग और ब्रेकिंग सिस्टम में भी काफी तरक्की हो रही है, इसलिए टायरों से गाड़ी चलाना न सिर्फ आसान बल्कि सुरक्षित बन गया है।

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