आने वाले कुछ ही महीनों में कारों में काफी एडवांस टेक्नोलॉजी का प्रयोग होने लगेगा

Saturday, 04 Jan 2020 11:04:36 AM

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अब आने वाले कुछ महीनों में नई गाड़ियों में क्या-क्या बदलाव होने वाले हैं जिससे हमारा ड्राइविंग एक्सपीरियंस और बढ़िया होगा?

आने वाले कुछ ही महीनों में हमारी कारें बेहतरीन टेक्नोलॉजी से लैस होने वाली है।अन्य फील्ड की तरह ऑटोमोबाइल फील्ड में भी काफी अच्छे-अच्छे रिसर्च हुए हैं और धीरे-धीरे हमारी कारों में काफी एडवांस टेक्नोलॉजी का प्रयोग होने लगा है।

आइए जाने ऐसे कुछ सिस्टम के बारे में जो धीरे-धीरे अब सभी कारों में दिखने लगेंगे:

1:- की लेस सिस्टम

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यानी कि बगैर चाबी वाला सिस्टम। की लेस सिस्टम में अब हमें गाड़ी स्टार्ट करने के लिए चाबी की जरूरत नहीं पड़ेगी। हमारी गाड़ी पूरी तरह से सेंसर आधारित होगी। अभी की लेस सिस्टम करीब 20% कारों में प्रयोग में आ चुका है।

2:- स्टॉप स्टार्ट टेक्नोलॉजी

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अभी बहुत सी जर्मन कारों में तथा कुछ हाइब्रिड कारों में ये सिस्टम आ चुका है।इस टेक्नोलॉजी का मुख्य उद्देश गाड़ी की ईंधन को बचाने और गाड़ी से निकलने वाले धुएं को कम करने के लिए शुरू किया गया है।जब किसी रेड लाइट सिग्नल पर हमारा पैर ब्रेक पर पड़ता है तब स्टॉप स्टार्ट टेक्नोलॉजी के चलते इंजन अगले ही पल बंद हो जाते हैं और जैसे ही हमारा पैर ब्रेक पर से हटता है इंजन ऑटोमेटिक चालू हो जाते हैं।

3:- टर्बोचार्ज इंजन

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टर्बोचार्ज एक ऐसा उपकरण है जो गाड़ी के इंजन की क्षमता को बढ़ा देता है जिससे इंजन में बहुत ज्यादा हवा जाती है और इंधन पूरी तरह से जलकर ज्यादा ज्यादा ऊर्जा पैदा करता है।पहले टर्बो चार्जर सिर्फ स्पोर्ट्स कार जीप और ट्रक में इस्तेमाल किया जाता था लेकिन अब टर्बो चार्जर टेक्नोलॉजी करीब 50% कारों में प्रयोग में आ चुकी है और धीरे-धीरे यह सभी कारो में प्रयोग में आने लगेगी।

4:- जेनॉन और एलईडी लाइट्स

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पहले कारों में टंगस्टन फिलामेंट लाइट इस्तेमाल होती थी फिर हैलोजन बल्ब इस्तेमाल होने लगी लेकिन अब गाड़ियों में जेनॉन और एलईडी लाइट्स इस्तेमाल होने लगी है। जेनॉन लाइट हैलोजन लाइट के मुकाबले ज्यादा चमकदार होती हैं और एलईडी लाइट्स भी ज्यादा चमकदार होती हैं और बहुत लंबे समय तक चलती है साथ ही साथ यह कम ऊर्जा में भी अच्छी रोशनी देती है अब करीब 60% गाड़ियों में एलईडी और जेनॉन लाइट्स का इस्तेमाल होने लगा है।

5:- टायर इन्फ्लेटर किट

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आजकल नई कारों में स्टेपनी नहीं होती है। दरअसल नई कारों में स्टेपनी को टायर इन्फ्लेटर किट से रिप्लेस कर दिया गया है। पहले सिर्फ 5% गाड़ियों में ही टायर इन्फ्लेटर कीट होती थी लेकिन अब करीब 23% गाड़ियों में टायर इन्फ्लेटर कीट आने लगी है।इस कीट के द्वारा गाड़ी का वजन हल्का रहता है साथ ही साथ आप की डिक्की में आपको काफी जगह मिलती है।

6:- डिजिटल पैनल

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अब धीरे-धीरे सभी कारों में एनालॉग मीटर सिस्टम की जगह डिजिटल मीटर सिस्टम लगाए जा रहे हैं.. डिजिटल पैनल सिस्टम काफी विश्वसनीय होते हैं.. यह जल्दी खराब नहीं होते और इनमें ज्यादा मैकेनिकल पुर्जे नहीं होते इसलिए यह बहुत लंबे समय तक चलते हैं।

7:- इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक

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धीरे धीरे तमाम गाड़ियों में हैंडब्रेक की जगह इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक सिस्टम इस्तेमाल होने लगा है ..इस वजह से गाड़ियों में काफी जगह भी होती है।इस सिस्टम में जैसे ही आप गाड़ी खड़ा करेंगे इलेक्ट्रॉनिक सेंसर सिस्टम गाड़ी में ऑटोमेटिक ब्रेक लगा देगा।

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