अर्थशास्त्री ने आंकड़े गिना कर कहा, मोदी राज में सबसे ज़्यादा बढ़ी ग़रीबों की ग़रीबी और अमीरों की अमीरी

 
Pm modi
नई दिल्ली. सिस्टर निवेदिता विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ बिजनेस के निदेशक रतन खासनवीस ने दावा किया है कि देश में अमीरी और गरीबी की खाई बढ़ती जा रही है। उन्होंने टेलीग्राफ के एक इंटरव्यू में कहा कि जहां देश में अमीर और अमीर होता जा रहा है तो वहीं गरीब की गरीबी बढ़ती जा रही है। रतन खासनवीस ने कहा कि हम भूल जाते हैं कि अतीत में एक और भारत था जहां अमीरी-गरीबी के बीच बनी असमानता घट रही थी। टॉप 1 प्रतिशत कमाई करने वालों के लिए देश की आय का हिस्सा 1950 के दशक के मध्य से 1980 के दशक के मध्य तक लगभग 13 प्रतिशत से 5 प्रतिशत से कम रहा। उन्होंने कहा कि 1980 के दशक के मध्य में एक समय ऐसा रहा कि जब व्यापार-समर्थक बाज़ार विनियम नीतियों को लागू किया गया था। टॉप 1 फीसदी के पास वित्तीय वर्ष की हिस्सेदारी 1980 के दशक के मध्य में 5 प्रतिशत से कम से दोगुनी होकर 2000 में 10 प्रतिशत हो गई थी।
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रतन खासनवीस ने कहा कि इसमें हमें यह भी देखना चाहिए कि भारत अब डॉलर अरबपतियों की वैश्विक संख्या में तीसरे स्थान पर है। वहीं असमानता के मामले में अतीत के आंकड़ों की वर्तमान के आंकड़ों से तुलना करने पर गंभीरता संकेत मिलते हैं। यह विश्व असमानता रिपोर्ट में उजागर होता है। उन्होंने विश्व असमानता रिपोर्ट 2022 को लेकर कहा कि यह रिपोर्ट बताती है कि भारत में शीर्ष 10 प्रतिशत और शीर्ष 1 प्रतिशत अब कुल देश की आय का क्रमशः 57 प्रतिशत और 22 प्रतिशत है। जबकि कुल राष्ट्रीय आय में निचले स्तर की 50 प्रतिशत आबादी का हिस्सा कम होकर 13 प्रतिशत रह गया है।
* 13 फीसदी कमाई का हिस्सा निचले तबके के पास  
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उन्होंने ‘विश्व असमानता रिपोर्ट 2022’ शीर्षक वाली रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की 10 फीसदी आबादी के पास देश की आय का कुल 57 फीसदी हिस्सा है। वहीं एक फीसदी आबादी के पास 22 फीसदी हिस्सा है। ऐसे में निचले तबके के पास 13 फीसदी कमाई ही है। बता दें कि इस रिपोर्ट को तैयार करने में फ्रांस के अर्थशास्त्री थॉमस पिकेट्टी समेत कई विशेषज्ञों ने अपना योगदान दिया