श्रद्धालुओं और कर्मचारियों को मिलेगी अब काशी विश्वनाथ मंदिर में यह सुविधा

 
काशी विश्वनाथ मंदिर
नई दिल्ली. सोमवार (10 जनवरी, 2022) को यह जानकारी सूक्ष्म, लघु एवं मझोला उद्यम मंत्रालय की ओर से दी गई। उत्तर प्रदेश में वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं और वहां काम करने वाले कर्मचारियों को अब मंदिर परिसर में नंगे पैर जाने की जरूरत नहीं होगी। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने श्रद्धालुओं और कर्मचारियों को हाथ से बनी कागज की चप्पलें (स्लिपर) की बिक्री शुरू करने का फैसला किया है। 14 जनवरी से केवीआईसी हस्तनिर्मित कागज की चप्पलों की बिक्री शुरू करेगा।
काशी विश्वनाथ मंदिर
केवीआईसी का यह कदम ऐसे वक्त पर आया है, जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर के कर्मचारियों के लिए जूट से बनी चप्पलें भेजी हैं। दरअसल, पीएम को यह जानकारी मिली थी कि वहां काम करने वाले लोगों को नंगे पैर रहना पड़ता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि मंदिर परिसर में चमड़े या रबड़ के जूते पहनने की मनाही है। ये चप्पलें काशी विश्वनाथ मंदिर के गलियारे में स्थित खादी दुकान पर उपलब्ध होंगे। इन चप्पलों को इस्तेमाल के बाद फेंका जा सकता है। यानी ये ‘यूज एंड थ्रो’ स्लिपर होंगे। मंत्रालय के मुताबिक, ये चप्पलें पर्यावरणानुकूल हैं और कम कीमत पर उपलब्ध होंगी। 
एक सूत्र ने बताया, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी का काशी विश्वनाथ धाम से गहरा जुड़ाव रहा है और वे वाराणसी में सभी मुद्दों तथा घटनाक्रम पर नजर रखते हैं। छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने तथा गरीबों के प्रति उनकी चिंता का यह एक और उदाहरण है। सरकारी सूत्रों ने इस बारे में सोमवार को बताया कि जिन लोगों के लिए जूते भेजे गए हैं उनमें पुजारी, सेवा करने वाले लोग, सुरक्षा कर्मी, सफाई कर्मी और अन्य लोग शामिल हैं। मोदी ने जूट के जूते खरीदे और धाम में भेजे ताकि वहां ड्यूटी कर रहे लोगों को कड़ाके की ठंड में नंगे पैर न रहना पड़े। पीएम मोदी ने पिछले महीने धाम के पहले चरण का उद्घाटन किया था जिसमें काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर का विस्तार और उसका सौंदर्यकरण शामिल