Lifestyle News- ये है मकर संक्रांति और तिल का रिश्ता

 
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दोस्तो कल देश में त्यौहार का मौहाल था, क्योंकि कल 14 जनवरी को देश के अलग- अलग राज्य में विभिन्न नामों से मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जाता हैँ। आपको बता दें कि कल से सूर्य अस्त होना शुरू हो जाता है। कल लोग पवित्र स्नान करते हैं दान देते हैं और तिल का सेवन करते हैं। अगर ग्रंथो माने तो ब्रह्मांड के निर्माता ब्रह्मा ने काले और सफेद तिल का निर्माण किया था।

इसी वजह से तिल को ब्रह्मांड में सबसे पहला भोजन माना गया है। इसके बिना यज्ञ, हवन पूर्ण नहीं हो सकता और श्राद्ध पक्ष में तर्पण भी बिना तिल के नहीं हो सकता। तिल के पानी से स्नान करना बहुत अच्छा माना जाता है।

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धर्म पुराण में कथाओं के अलावा आयुर्वेद और विज्ञान ने भी तिल के महत्व को गया हैं, तिल के बीज औषधीय गुणों के लिए उत्तम होते हैं। अनुसंधान से पता चला है कि तिल के बीज एंटीऑक्सिडेंट, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ तांबा, मैग्नीशियम, लोहा, मैंगनीज, फास्फोरस, जस्ता, बी 1 विटामिन और उच्च फाइबर से भरपूर होते हैं। इससे शरीर को कई फायदे होते हैं।

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तिल के सेवन से हड्डियाँ मजबूत होती हैं,

जोड़ों का दर्द कम होता है,

कोलेस्ट्रॉल कम होता है,

 सर्दी-खांसी ठीक होती है,

 रोग प्रतिरोधक क्षमता और पाचन शक्ति बढ़ती है।

हालांकि आयुर्वेद कहता है कि तिल गर्म होने के कारण ठंड के मौसम में इसका सेवन करना चाहिए। संक्रांति ठंड का समय है। तिल का सेवन जुकाम और जोड़ों के दर्द के लिए फायदेमंद होता है लेकिन तिल के तेल से मालिश करने से शरीर में नसों और रक्त के प्रवाह को सुचारू करने में मदद मिलती है। तिल के बीज जीवनदायिनी माने जाते हैं। इससे ठंड के दिनों में तिल का अधिक सेवन करने से लाभ होता है।