Travel Tips: इस जगह 1 किलोमीटर का सफर करने के लिए देने पड़ते हैं फ्लाइट की टिकट से भी ज्यादा पैसे, जानें वजह !

 
Aa
ये बात हम सब जानते है की जब भी हमें किसी लंबी दूरी को जल्दी तय होता है तो हम फ्लाइट से जाते हैं, जिसके लिए हमे काफी महंगा टिकट खरीदना पड़ता है. लेकिन इतना महंगा टिकट इसलिए नहीं खलता है क्योंकि फ्लाइट आपके समय को बचा देती है, साथ आपको सुविधाएं भी अच्छी मिलती हैं. लेकिन क्या आप जाते है कि बिहार के बक्सर में एक जगह ऐसी है, जहां लकड़ी से बनी बेहद साधारण नाव से एक डेढ़ किलोमीटर का सफर तय करने के लिए फ्लाइट की टिकट से ज्यादा पैसे देने पड़ते है। ही हां गंगा नदी (Ganga River) पार जाकर लौटने के लिए नाव वाले करीब 7 हजार रुपए वसूलते हैं. ये यात्रा मात्र एक से डेढ़ किलोमीटर की होती है और लोग नाविकों को मुंह मांगी रकम देने को तैयार रहते हैं. इतना ही नहीं, इस यात्रा को तय करने के लिए सुबह से लोगों की लाइन लग जाती है. इस लेख के माध्यम से जानते गैनिस्की वजह -
* छोटी नाव का किराया है 6800 रुपए :
इस सफर को पूरा करने के लिए नाविक एक परिवार से करीब 1700 रुपए वसूलते हैं. परिवार से सिर्फ पांच लोगों को ही सवार कराते हैं. अगर आप 10 लोगों को ले जाना चाहते हैं तो आपको 3400 रुपए देने होंगे. वहीं विशेष मुहूर्त में नाविक छोटी सी नाव में कम से कम 4 परिवारों को बैठाते हैं. ऐसे में करीब 20 लोग एक दूसरे से सटकर किसी तरह इस सफर को तय करते हैं और नाविक इसके लिए 6800 यानी करीब 7 हजार का किराया वसूलते हैं. इस तरह नाविक विशेष मुहूर्तों पर अपनी साल भर की कमाई कर लेते हैं।
* बक्सर के रामरेखा घाट की है विशेष मान्यता :
Aa
बक्सर जिले की धार्मिक मान्यता काफी है, इस कारण इस स्थान को मिनी काशी के नाम से भी जाना जाता है. यहां गंगा के किनारे रामरेखा घाट नाम का एक तीर्थ है, जहां स्नान के लिए दूर बिहार और यूपी के अलावा नेपाल आदि दूर दराज के ​इलाकों से लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है. हिंदू श्रद्धालु विभिन्न धार्मिक अवसरों पर पारिवारिक अनुष्ठान, मुंडन और स्नान के लिए यहां आते हैं. किसी विशेष मुहूर्त पर यहां पैर रखने की जगह भी नहीं होती।
* मुंडन संस्कार में वसूलते हैं मनमानी रकम :
किसी विशेष मुहूर्त पर यहां बच्चों का मुंडन कराने के लिए लोगों की लंबी लाइन लग जाती है. इसी स्थिति का फायदा यहां के नाविक उठाते हैं. यहां ज्यादातर लोग सपरिवार पहुंचकर बच्चों का मुंडन कराते हैं. मुंडन संस्कार के दौरान गंगा नदी के दो छोर को एक रस्सी के जरिए नापना होता है. इसके लिए आम की लकड़ी से बने खूंटे में रस्सी का एक सिरा बांध कर लोग नाव के सहारे गंगा को पार करते हैं और दूसरे सिरे पर पहुंचने के बाद खूंटा गाड़ कर रस्सी बांधते हैं. इसके बाद फिर वापस लौट आते हैं. इस बीच नदी के दोनों किनारे घाटों पर पूजा भी की जाती है. इस पूरी प्रक्रिया में करीब आधे से एक घंटे का समय लगता है, जिसके लिए नाविक मनमानी रकम मांगते हैं।