राजस्थान का यह सरकारी स्कूल नहीं है फाइव स्टार होटल से कम, देखने के लिए आ रहे हैं विदेशी पर्यटक

 
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हमारे देश में शिक्षा का स्तर इतना बढ़ चुका है कि हर जगह अब स्कूल खुलते ही जा रहे हैं. इलाके में 5 से 10 प्राइवेट स्कूल में ही जाएंगे. जहां इस तरह से स्कूलों में बढ़ रहा है दूसरी तरफ इनकी फीस भी ज्यादा से ज्यादा बढ़ रही है. इस मामले में सरकारी स्कूल भी पीछे नहीं है. सरकारी स्कूलों का मुकाबला प्राइवेट स्कूलों से हो रहा है, क्योंकि एक तरफ तो सरकारी स्कूल में फीस कम होती है तो दूसरी तरफ वह अच्छी सुविधा देकर लोगों में अपनी रुचि पैदा कर रहे है.

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आपको बता दें कि राजस्थान में भी इसी तरह के कई प्रयास सरकारी स्कूलों द्वारा किए जा रहे हैं जो कि बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला बढ़वाने के लिए किए जा रहे हैं. अब इस लिस्ट में धौलपुर जिले का एक सरकारी स्कूल भी जुड़ चुका है जो कुछ समय पहले पूरी तरह से बंद हो चुका था. लेकिन जैसे ही ये स्कूल दोबारा शुरू हुआ इसकी पूरी सूरत बदल चुकी थी. इस सरकारी स्कूल में सिर्फ पढ़ने वाले बच्चों की संख्या ही नहीं बढ़ी है, बल्कि इसे विदेशी पर्यटक भी देखने के लिए आ रहे हैं.

बंद स्कूल को ज्ञापन देकर खुलवाया

इस सरकारी स्कूल में लगातार छात्रों की संख्या कम हो रही थी और जब इसमें कुल 30 छात्र बचे तब सरकार ने छात्रों का तबादला दूसरी सरकारी स्कूल में करवा दिया और इस स्कूल को 2014 में पूरी तरह से बंद कर दिया गया. सरकार के इस फैसले से गांव वालों गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और वह रोज सरकार को ज्ञापन भेजकर स्कूल को खोलने की मांग करते थे. लगातार तीन महीने तक ज्ञापन भेजने के बाद सरकार ने ग्रामीणों की मांग को अनुमति दी और इस प्राथमिक विद्यालय को दोबारा शुरू किया.

इंडियन रेलवे के साथ महलों का दिया लुक

स्कूल के खुलते ही बच्चों के नामांकन बढ़ने लगे और माता-पिता का ध्यान भी स्कूल की तरफ आकर्षित करने के लिए स्कूल के हेडमास्टर राजेश शर्मा ने स्टाफ के सदस्यों के साथ मिलकर पूरी स्कूल को रेलवे डिब्बों का लुक दे दिया. इस निर्माण कार्य में 70000 रूपये का खर्च आया जो कि हेड मास्टर साहब ने खुद अपनी सैलरी से दिया. इसके अलावा स्कूल को जयपुर शहर की बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों जैसा हेरिटेज लुक दे दिया गया जिसमें कुल 52 हजार रूपये का खर्चा हुआ. इसे सरकारी ग्रांट, ग्रामीणों और स्कूल स्टाफ की मदद से पूरा किया गया.

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अब ये स्कूल पूरी तरह से भारतीय रेलवे और हैरिटेज लुक में बदल चुकी थी. राजकीय प्राथमिक विद्यालय शेरपुर की स्कूल की चर्चा अब भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी हो रही है. स्कूल की व्यवस्थाओं को देखते हुए आगरा टूरिज्म और विदेशी पर्यटकों ने इस का दौरा किया था. इस तरह के भव्य लुक, बेहतर संचालन और आधुनिक सुविधाओं को देखकर वे बहुत खुश हुए और उन्होंने जल्दी ही विदेशी मेहमानों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल को स्कूल का दौरा कराने का निर्णय भी ले लिया.

बच्चों के लिए खास सुविधाएं

इससे सरकारी स्कूल में प्राइवेट स्कूलों की तरह ही छोटे बच्चों के लिए लाइब्रेरी, खेलने के लिए झूले, खिलौने, बैठने के लिए कुर्सी टेबल और अन्य सामान के साथ वाटर कूलर और बच्चों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं. इस सरकारी स्कूल का लुक पूरी तरह बदल जाने के बाद इसमें नामांकन बढ़ाने का सिलसिला शुरू हो चुका है. लगातार नामांकन बढ़ते देखकर सरकार ने इसे पांचवी स्कूल से बढ़ाकर आठवीं स्कूल तक का विद्यालय कर दिया है. इस सरकारी स्कूल का इतना भव्य लुक और डिजाइन देखने के बाद शेरपुर के आस पास के गाँवो के बच्चे भी यहाँ पढ़ने आते है.