Health Care Tips: ज्यादा उम्र में गर्भधारण करने से महिलाओं की सेहत पर क्या बुरा असर पड़ता है !

 
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किसी भी महिला के लिए मां बनना इस दुनिया की सबसे बड़ी खुशी होती है। डॉक्टरों का कहना है कि 10 में से 1 महिला में गर्भावस्था या प्रसव के दौरान कुछ परेशानियों की आशंका रहती है. इनमें से ज्यादातर परेशानियां बस एक संकेत की तरह होती हैं कि आपको सतर्क हो जाना चाहिए । ताकि बच्चे की बेहतर देखभाल हो सके। हालांकि गर्मावस्था (Pregnancy) के दौरान की गई लापरवाही से मां और बच्चे की सेहत पर असर पड़ सकता है। मदर्स डे के मौके पर रेनबो चिल्ड्रंस हॉस्पिटल की डॉ. रिंकू सेन गुप्ता ने गर्भावस्था के दौरान होने वाली कुछ परेशानियों और इनसे निपटने के तरीकों बताएं हैं।
* महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान इन बातों का रखें ध्यान :
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नियमित रूप से डॉक्टर की सलाह के अनुसार खून की जांच और अल्ट्रासाउंड कराते रहें. लाइफस्टाइल सही रखें और पोषणयुक्त भोजन करें. कम से कम 40 मिनट हल्का व्यायाम और ध्यान करें. आर्टिफिशियल प्रोटीन सप्लीमेंट लेने की कोई जरूरत नहीं है. अगर विशेष कारणों से डॉक्टर ने बेड रेस्ट की सलाह न दी हो तो गर्भावस्था के दौरान बेड रेस्ट करने से बचें. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में सही अस्पताल और डॉक्टर को चुनना भी जरूरी है. गर्भावस्था के दौरान हर छोटी-बड़ी अनियमितता पर ध्यान दें. सतर्क रहें तो इन परेशानियों का सामना करते हुए सुगमता से स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया जा सकता है।
* ज्यादा उम्र में गर्भ धारण करे से होने वाली परेशानियां :
1. डॉ. गुप्ता ने बताया कि कुछ महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) की दिक्कत होती है. प्लेसेंटा में खून का फ्लो कम हो जाता है और गर्भ में बच्चे को पर्याप्त पोषण मिलने में दिक्कत होती है. इसलिए जैसे ही इस परेशानी का पता चले, डॉक्टर की सलाह से दवाएं लेनी चाहिए. इससे बच्चे और मां को खतरा कम हो जाता है. प्रसव के साथ अक्सर हाई बीपी की यह समस्या दूर हो जाती है. इसी तरह की एक आम समस्या है ब्लड शुगर बढ़ने की।
2. प्रीमैच्योर डिलीवरी जैसी बढ़ रहीं परेशानियां :
 
डॉ. गुप्ता ने कहा कि ज्यादा उम्र में गर्भधारण करने और आईवीएफ की ओर बढ़ते रुझान से गर्भावस्था के दौरान हाई बीपी, एक से ज्यादा गर्भ ठहरने और समयपूर्व प्रसव (Premature delivery) जैसी परेशानियां बढ़ी हैं. प्रसव के बाद ज्यादा रक्तस्राव की परेशानी भी हो सकती है. इन सभी समस्याओं को पूरी तरह से टाला तो नहीं जा सकता है, लेकिन कुछ सतर्कता बरतते हुए इनके खतरे को कम जरूर किया जा सकता है।