फुटबॉल ने इस कदर बदल दी इस गरीब लडक़ी की पुरी जिंदगी....

Thursday, 14 Jun 2018 05:15:30 PM
फुटबॉल ने इस कदर बदल दी इस गरीब लडक़ी की पुरी जिंदगी....
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इंटरनेट डेस्क। अक्सर सुना हैं कि खेल लोगों की जिंदगी में परिवर्तन लाते हैं। इसलिए पढ़ाई के साथ खेलों का भी आज अपना एक अलग महत्व हैं। ऐसा ही एक वाकया हरियाणा के गरीब परिवार में जन्मी अन्याबाई के साथ हुआ हैं, जिसके खेलनें के जुनून ने उसकी गरीबी दूर कर उसे एक फुटबॉल खिलाड़ी के रूप में मशहूर कर दिया। आज भी भारत में अनुसूचित जाति समुदाय की दशा गांवों में बहुत दयनीय है। जातिवाद के साथ ही गरीबी भी इस समुदाय के लोगों पर हावी हैं। अन्याबाई इसी समुदाय की एक गरीब लडक़ी है, जिसने अपनी मेहनत के दम परदेश में अपनी अलग पहचान बनाई हैं और साथ ही समाज में व्याप्त वर्ग भेद और लिंग भेद को चुनौति देकर खुद को साबित किया हैं। 


अन्याबाई हरियाणा के भिवानी जिले से करीब 30 किमी दूर स्थित अलखपुरा के के एक गरीब परिवार में जन्मी थी। जन्म के कुछ समय बाद ही उसके पिता की हार्ट अटेक से मौत हो गई थी। पिता की मौत के बाद अन्याबाई की मां माया देवी ने ही पुरे परिवार की परवरिश का भार उठाया। अन्याबाई ने प्रदेश स्तर पर चार साल पहले अपने विद्यालय के लिए फुटबॉल मैच में जीताया था और इस दौरान उसे पहली बार पुरस्कार के रूप में 54000 रूपयें की राशि मिली थी। उस समय अन्याबाई महज 15 साल की थी और ईनाम की रकम उसके परिवार की एक साल की कमाई से भी ज्यादा थी। इसके बाद से ही उसकी जिंदगी में परिवर्तन शुरू हो गयें थे। 


अन्याबाई के परिवार में मां के अलावा एक भाई और एक बहन है जिनका सबका पालन पोषण उनकी अकेली मां ने ही किया हैं। अन्याबाई की मां ने बताया कि उनके परिवार या गांव में अबतक इतनी बड़ी सफलता अर्जित नहीं की है। मुझे भी पहले इससे कोई उम्मीद नहीं थी की मेरी बेटी इतना बड़ा मुकाम हासिल कर सकती हैं। अन्याबाई की मां ने मेहनत मजदूरी कर बच्चों को पाला है और अपनी बेटी के खेल के लिए भी हमेशा प्रयास किये है। केवल 150 रूपये रोजाना की मजदूरी जो कि परिवार चलाने के लिए काफी नहीं थी। इसके बाद भी उन्होंने अपनी बेटी को खेलने दिया और बच्चों की परवरिश में कभी पीछे नहीं हटी। इसी का परिणाम है कि आज अन्याबाई फुटबॉल की एक मशहूर खिलाड़ी बनी हैं। 


इसके बाद काफी मेहनत और अपने खेल के कौशल से अन्याबाई का चयन राष्ट्रीय स्तर टीम में हो गया। कुछ साल बाद ही उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। विद्यालय की फुटबॉल कोच के अनुसार अन्याबाई को राष्ट्रीय स्तर का एक मैच खेलने के लिए मेहनतानें के रूप में करीब 50 से 60 हजार रूपये मिलते हैं जिससे साल भर में करीब 3-4 मैच खेलने के बाद अन्याबाई साल के 2-ढाई लाख रूपये कमा लेती है। इस दौरान ना केवल उसने पैसे कमाये बल्कि देश का प्रतिनिधित्व भी किया और इन सब से उसके साथ उसके परिवार की भी आर्थिक परेशानियां कम हुई है। 


अन्याबाई का कहना है कि वह अर्जेंटिना के प्रसिद्ध खिलाड़ी मेस्सी की तरहा खेलना चाहती है और इसके लिए बहुत मेहनत भी करती है। स्कूल की पढ़ाई पुरी कर वह अपना पुरा समय फुटबॅाल को देगीं साथ ही अंग्रेजी भी सिखेंगीं। अन्याबाई ने बताया कि 2016 में तजाकिस्तान में हुए एशियाई महिला फुटबॉल चैंपियनशिप के अंडर-14 वर्ग के मैच के बाद मेरी पुरी जिंदगी बदल गई। उसके बाद मिले पैसो से मैंने अपने गांव में ही दो कमरे का एक छोटा सा घर बनाया। शुरू में जब में खेल के लिए बाहर जाती थी तो एक अजीब सा डर लगता था लेकिन अब हालात बदल गये है अब नये-नये दोस्त बनाना अच्छा लगता हैं। 

उसने अपने गांव का जिक्र करते हुए खुश होकर बताया कि गांव में एक खेल का मैदान है जहां रोज 200 से ज्यादा लड़कियां करीब तीन घंटे फुटबॉल का अभ्यास करती हैं। अन्याबाई ने कहा कि मैं चाहती हूँ की मेरी तरह गांव की और भी लडक़ीयां इस खेल में अपना नाम बनायें।  
 

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