एलौरा की इस गुफा का रहस्य आज भी है बरकरार, वास्तुकला का है अदभुत नमूना

Tuesday, 06 Nov 2018 10:08:20 AM
एलौरा की इस गुफा का रहस्य आज भी है बरकरार, वास्तुकला का है अदभुत नमूना

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इंटरनेट डेस्क। हमारे देश में कई ऐसे गुुफा और मंदिर है जो पूरी तरह से अपने रहस्यों से भरे पड़े है और इन रहस्यों को जान पाने में हमारे वैज्ञानिक भी असफल है। लेकिन आज हम आपको ऐसे शिव मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जिसकी वास्तुकला अदभुत नमूना है। इस मंदिर से जुड़े  रहस्यों को सुलझाने में वैज्ञानिक असफल है। हम बात कर रहे है महाराष्ट्र के औरंगाबाद की 34 एलौरा की गुफाओं की जिसमें सबसे अलग एलौरा की गुफा कैलाश मंदिर है। इस मंदिर को देखने के लिए लोग दूर दूर से आते है। इस मंदिर की खासियत है कि कोई भी मकान या फिर मंदिर बनाते समय उसका निर्माण नीचे से उपर की तरफ होता है।


लेकिन इस मंदिर का निर्माण उपर से नीचे की और किया गया है। मतलब पहले इसे उपर से बनाना शुरू किया गया। इस शिव मंदिर का​ निर्माण  विशालकाय चट्टानों को काटकर किया गया है। चट्टानों को काट काट कर , उसे खोखला कर इसके खम्भे,द्धार, नक्काशी बनाएं गए है। इसके अलावा बारिश के पानी को बाहर करने के लिए नाली,पुल, मंदिर का टावर और बिल्कूल बारिक डिजाइन किया गया है जिसे देखने के बाद शायद आप भी इसके कायल हो जाएंगे। आज के इंजीनियर्स का मानना है कि आज के समय में इस तरह के मंदिर को बनाने में साल नहीं बल्कि सदियां लग जाएं और उस समय इस मंदिर का निर्माण सिर्फ 18 साल में कर दिया गया था।

इस मंदिर को कैलाश पर्वत की तरह बनाने की कोशिश की गई थी इस वजह से इसका नाम कैलाश मंदिर रखा गया था। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण राष्ट्रकुल राजा कृष्ण राज प्रथम के काल में किया गया होगा लेकिन इसका निर्माण कब, कैसे और किसने कराया इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। इस मंदिर की एक दिवार पर लेख लिखा हुआ है लेकिन वह अब पुराना हो चुका है और उस भाषा को कोई नहीं पढ़ पाया है। ये मंदिर अपने अदभुत वास्तुकला की मिसाल देता है।

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