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चंद्रशेखर आजाद की बचपन की इस वीर कहानी को जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

Wednesday, 15 May 2019 10:10:53 AM
चंद्रशेखर आजाद की बचपन की इस वीर कहानी को जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

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इंटरनेट डेस्क। चंद्रशेखर आजाद की वीर गाथा तो सभी ने सुनी है बता दें की चंद्रशेखर कट्टर सनातन धर्मी ब्राहाण परिवार में पैदा हुए थे । इनके पिता नेक और धर्मनिष्ठ थे और उनमें अपने पांडित्य का कोई अहंकार नहीं था। वे बहुत स्वाभिमानी और दयालु प्रवृति के थे। उन्होंने पढ़ना-लिखना उन्होंने गाँव के ही एक बुजुर्ग श्री मनोहरलाल त्रिवेदी से सिखा था, जो उन्हें घर पर निशुल्क पढ़ाते थे। बचपन से ही चंद्रशेखर में भारतमाता को स्वतंत्र कराने की भावना कूट कूटकर भरी हुई थी। इसी कारण उन्होंने स्वयं अपना नाम आजाद रख लिया था।

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एक बार दीवाली के समय पर चंद्रशेखर कहीं से रंगीन रोशनी करने वाली दियासलाई ले आए वह उस दियासलाई की एक-एक करके तीली जलाते औए फिर उसकी लौ को कुतूहल की दृष्टि से देखते। उनके कई साथी उनके साथ खड़े होकर यह खेल देख रहे थे। किसी की समझ में यह नहीं आ रहा था की तीली रोशनी कैसे करती है।

जब एक तीली जलाने पर इतनी रोशनी करती है, तब सारी तीलियाँ एक साथ जलाने पर कितनी रोशनी होगी?’ लेकिन इन सब तीलियों को एक साथ जलाए कौन?  चंद्रशेखर के सभी मित्रों ने एसा करने से मना कर दिया इतने में चंद्रशेखर ने निर्भीकता के साथ बोला-“देखो! मैं जलाकर दिखाता हूँ।

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ऐसा कहकर चंद्रशेखर ने सारी तीलियाँ एक साथ जला दी। तीलियाँ फक्क से जल उठी और तेज़ रोशनी हुई।  तीलियों के एक साथ जलने से चंद्रशेखर का हाथ भी जल गया, पर वह रोया नहीं। उनके सहपाठियों को लगा की चंद्रशेखर अपने घाव का इलाज़ कराते वक़्त तो शायद रोए, परन्तु उन्हें आश्चर्ये हुआ जब चंद्रशेखर ने हँसते-हँसते, उसी निर्भीकता के साथ अपने हाथ की पट्टी कराई थी। इस बात के उसी दिन यह साबीत हो गया था की चंद्रशेखर आजाद अपने देश के लिए कुछ बड़ा जरुर करेंगे।

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