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टीचर्स डे: एक बार जरूर पढि़ए डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जिंदगी से जुड़ी इन बीस बातों को, जरूर बदलेगा आपका नजरिया ओर जीवन

Thursday, 05 Sep 2019 12:12:11 PM

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पूरे भारतवर्ष में आज बड़े जोश के साथ शिक्षक दिवस मनाया जा रहा है। अपने गुरु को याद करने और उन्हें सम्मान देने के लिए इस दिन की शुरुआत करने का श्रेय देश के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को जाता है। वहयुगों युगों तक भारत मेंशिक्षक, मार्गदर्शक एक सादगीपूर्ण नेता के रूप में याद किये जाएंगे। भारत में शिक्षक दिवस मनाने की शुरुआत करने का श्रेय डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को ही जाता है।

भारत में 5 दिसंबर को ही शिक्षक दिवस मनाया जाता है। पूर्व राष्ट्रपति ओर शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनके जन्मदिन को ही शिक्षक दिवस यानी टीचर्स डे के रूप में मनाया जाता है। जबवह भारत के राष्ट्रपति बने तो उनके कुछ छात्रों ने उनका जन्मदिन मनाना चाहा। उन्होंने जवाब दिया, मेरा जन्मदिन मनाने की बजाए अगर 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाए तो यह मेरे लिए गर्व की बात है। उनके सम्मान में तब से शिक्षक दिवस हरसाल मनाया जाता है।

आइये जानते हैं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन से जुड़ी खास बातें.

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तिरुत्तानी, मद्रास में हुआ था।

सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म तेलुगु भाषी नियोगी ब्राह्मण हिंदू परिवार में (तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी के तिरुत्तानी)हुआ था।

उनके पिता का नाम सर्वपल्ली वीरस्वामी और उनकी माता का नाम सर्वपल्ली सीता (सीताम्मा) था।

उनके शुरुआती साल तिरुत्तानी और तिरुपति में बीते थे।

उनके पिता एक स्थानीय ज़मींदार (स्थानीय जमींदार) की सेवा में अधीनस्थ राजस्व अधिकारी थे।

उनकी प्राथमिक शिक्षा थिरुत्तानी के केवी हाई स्कूल में हुई थी। 1896 में वे तिरुपति के हर्मन्सबर्ग इवेंजेलिकल लूथरन मिशन स्कूल और सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय, वाजापेट में चले गए।

मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज अपनी कॉलेज की शिक्षा पूरी की।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान दार्शनकि, राजनेता, उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति और शिक्षक थे।

1952 से लेकर 1962 तक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति रहे।

1962 से लेकर 1967 डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के दूसरे राष्ट्रपति रहे।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सबसे प्रतिष्ठित तुलनात्मक धर्म और दर्शन के विद्वानों के रूप में जाने जाते हैंं।

वे मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज में सहायक प्रोफेसर और बाद में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर बने।

इसके बाद डॉ. सर्वपल्ली ने मैसूर विश्वविद्यालय में बतौर दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर अपनी सेवाएं दीं।

इसके बाद डॉ.सर्वपल्ली कलकत्ता विश्वविद्यालय में मानसिक और नैतिक विज्ञान के किंग जॉर्ज वी चेयर और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पूर्वी धर्म और नैतिकता के प्राध्यापक प्रोफेसर बने।

डॉ सर्वपल्ली पहले ऐसे भारतीय थे जो ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पहले प्रोफेसर के रूप में नियुक्त हुए।

वह 1926, 1929 और 1930 में ऑक्सफोर्ड के मैनचेस्टर कॉलेज में अप्टन लेक्चरर थे।

1930 में उन्हें शिकागो विश्वविद्यालय में तुलनात्मक धर्म में हास्केल लेक्चरर नियुक्त किया गया।

राधाकृष्णन को उनके जीवन के दौरान कई उच्च पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिसमें 1931 में एक नाइटहुड, भारत रत्न, 1954 में भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, और 1963 में ब्रिटिश रॉयल ऑर्डर ऑफ मेरिट की मानद सदस्यता शामिल थी।डॉ सर्वपल्ली हेल्पेज इंडिया के वह भी संस्थापकों में से एक थे। भारत में वंचित बुजुर्गों के लिए एक गैर-लाभकारी संगठन है। इस संगठन के जरिए वंचित बुजुर्गों की मदद की।

राधाकृष्णन का मानना था कि शिक्षकों को देश में सबसे अच्छा दिमाग होना चाहिए। 1962 से, उनका जन्मदिन भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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