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भारत की ऐसी जगह जहां शादी की रस्म निभाने के लिए पीना पड़ता है सूअर का खून!

Thursday, 10 Jan 2019 01:57:58 PM
भारत की ऐसी जगह जहां शादी की रस्म निभाने के लिए पीना पड़ता है सूअर का खून!

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यह सच है कि भारत की विविधता में ही एकता है। भारतीय संस्कृति में प्रत्येक क्षेत्र के तौर तरीके बिल्कुल ही अलग नजर आते हैं। हर क्षेत्र के अपने रीति-रिवाज होते हैं। भारत के कुछ क्षेत्रों में शादी पवित्र संस्कार है, तो कुछ इलाकों में यह किसी उत्सव से कम नहीं है। लेकिन आज हम आपको शादी से जुड़ी एक ऐसी रोचक परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां शादी की रस्म पूरी करने के लिए दूल्हे को सात फेरे नहीं लेने पड़ते हैं, बल्कि एक जानवर का ताजा-गरम खून पीना पड़ता है। जी हां, यह खबर सौ फीसदी सच है। दरअसल मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में रहने वाली गौंड जनजाति में विवाह के दौरान ऐसी विचित्र और अनोखी रस्म निभाई जाती है। 

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इस रस्म के बारे में अगर किसी कट्टरपंथी ब्राह्मण या फिर पक्के मुसलमान को बता दिया जाए तो नतीजा क्या होगा, इस बारे में आप खुद सोच—समझ सकते हैं। भौगालिक स्थिति के हिसाब से विविधताओं से परिपूर्ण मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ हमारे देश के हृदयस्थल में स्थित हैं। इन राज्यों में अनेक जनजातियां और आदिवासी जातियां भी रहती हैं। 

ये आदिवासी जनजातियां सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपराओं को आज भी निभाती आ रही हैं। इसी क्रम में एक जनजाति का नाम है गौंड। यह जनजाति आज भी आधुनिकता से परे प्राचीन रीति- रिवाज़ों पर विश्वास करती है। यह जाति आज भी सदियों पीछे है। जानकारी के लिए बता दें कि गौंड जाति में विवाह के समय दूल्हा और दुल्हन का विवाह तभी संपन्न माना जाता है जब दूल्हा एक जानवर को न सिर्फ मारे अपितु उसका ताज़ा गर्म खून भी पीए। जी हां, इस जानवर का नाम है सूअर।

शादी की रस्म निभाने के लिए बाराती अपने साथ जिंदा सूअर भी लेकर आते हैं। शादी की रस्म पूरी होने के बाद आखिरी रस्म के दौरान साथ लाए सूअर को मारकर उसका ताजा गर्म खून पीना पड़ता है। इस रस्म को निभाना दूल्हे के लिए जरूरी माना जाता है। दूल्हा जब तक इस रस्म नहीं निभाता है, तब तक उसका विवाह संपन्न नहीं माना जाता है। 

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