loading...

हरियाली तीज दिला सकती हैं पति की लम्बी आयु

Thursday, 01 Aug 2019 11:38:18 AM
हरियाली तीज दिला सकती हैं पति की लम्बी आयु

Rajasthan Tourism App - Welcomes to the land of Sun, Sand and adventures

इंटरनेट न्यूज   हरियाली तीज का उत्सव  श्रावण मास में शुक्ल पक्ष  तृतीया को मनाया जाता है। यह उत्सव महिलाओं का उत्सव है। सावन में जब सम्पूर्ण प्रकृति हरी चादर से आच्छादित होती है उस अवसर पर महिलाओं के मन मयूर नृत्य करने लगते हैं। वृक्ष की शाखाओं में झूले पड़ जाते हैं। सुहागन स्त्रियों के लिए यह व्रत काफी मायने रखता है। आस्था, उमंग, सौंदर्य और प्रेम का यह उत्सव शिव- पार्वती  के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। चारों तरफ हरियाली होने के कारण इसे हरियाली तीज कहा जाता हैं। इस दिन सुहागन महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं और भगवान शिव के साथ मां पार्वती की पूजा करती हैं।

मान्यता के अनुसार, हरियाली तीज के दिन ही भगवान शिव का माता पार्वती से विवाह हुआ था। मां पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर श्रवण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को देवी पार्वती से विवाह किया था।

इस उत्सव में कुमारी कन्याओं से लेकर विवाहित युवा और वृद्ध महिलाएं सम्मिलित होती हैं। नव विवाहित युवतियां प्रथम सावन में मायके आकर इस हरियाली तीज में सम्मिलित होने की परम्परा है। हरियाली तीज के द‌िन सुहागन स्‍त्र‌ियां हरे रंग का श्रृंगार करती हैं। इसके पीछे धार्म‌िक कारण के साथ ही वैज्ञान‌िक कारण भी शाम‌िल है। मेंहदी सुहाग का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। इसलिए महिलाएं सुहाग पर्व में मेंहदी जरूर लगाती है। इसकी शीतल तासीर प्रेम और उमंग को संतुलन प्रदान करने का भी काम करती है। ऐसा माना जाता है कि सावन में काम की भावना बढ़ जाती है। मेंहदी इस भावना को नियंत्रित करता है। हरियाली तीज का नियम है कि क्रोध को मन में नहीं आने दें। मेंहदी का औषधीय गुण इसमें महिलाओं की मदद करता है।इस व्रत में सास और बड़े नई दुल्हन को वस्‍त्र, हरी चूड़‌ियां, श्रृंगार सामग्री और म‌िठाइयां भेंट करती हैं। इनका उद्देश्य होता है दुल्हन का श्रृंगार और सुहाग हमेशा बना रहे और वंश की वृद्ध‌ि हो।

loading...

Rajasthan Tourism App - Welcomes to the land of Sun, Sand and adventures

loading...