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सम्मान और कृत्यज्ञता का पर्व हैं गुरु पूर्णिमा

Monday, 15 Jul 2019 12:30:30 PM
                 सम्मान और कृत्यज्ञता का पर्व हैं गुरु पूर्णिमा

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इंटरनेट न्यूज   भारतीय संस्कृति  में गुरु को ईश्वर के रुप में माना जाता हैं।गुरु को हमेशा से ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश के  समान पूजा जाता हैं। कहा जाता हैं कि गुरु अंधकार से प्रकाश कि ओर ले जाने वाले सच्चे पथ प्रदर्शक होते हैं।16 जुलाई को मनाया जाने वाला अषाढ़ा मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु के प्रति आदर सम्मान और अपनी कृतयज्ञता व्यक्त करने का पर्व मनाया जाता हैं।

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 इस दिन लोग अपने दिवंगत या ब्रह्मलीन गुरु के समाधि या चरण पादुका  को धुप, दीप,पुष्प, अक्षत और चंदन आदि से विधिवत पूजन कर आशिर्वाद प्राप्त करते हैं।हमारी आत्मा ईश्वर के सत्य का साक्षात्कार करने के लिए बैचेन रहती हैं ये साक्षात्कार केवल पूर्ण गुरु द्वारा ही संभव हो सकता हैं। इसलिए हर जन्म में वो गुरु की तलाश करती रहती हैं।

ऐसी मान्यता हैं कि समस्त वेदों, उपनिषदों,पुराणों की रचना करने वाले महर्षि वेद व्यास का जन्म आषाढ़ मास की पूर्णिमा को लगभग 3000ई.पूर्व हुआ था। उन्ही के सम्मान में हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल की पूर्णिमा को ,के रुप में मनाया जाता हैं। बहुत से लोग इस दिन व्यास जी के चित्रों का पूजन और उनके द्वारा रचित शात्रों का अध्ययन भी करते हैं।
 

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