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सावन के महीने में शिवजी की उपासना से मिलते हैं मनोवांछित फल

Tuesday, 09 Jul 2019 03:19:35 PM
सावन के महीने में शिवजी की उपासना से मिलते हैं मनोवांछित फल

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17 जुलाई से शुरु हो रहे सावन मास को हिन्दू धर्म ग्रंथों में पवित्र महीना बताया गया हैं। कोई भी व्यक्ति सावन में सोमवार के दिन भगवान शिव को  बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, दूध, सफेद चंदन, अक्षत आदि से शिव का ध्यन, पूजा- पाठ  करते हैं तो उन पर भगवान शिव जल्दी प्रसन्न हो कर भक्तो को मनोवांछित फल देते हैं।   

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सावन को भगवान शिव का महीना माना जाता हैं। ऐसी मान्यता हैं कि जो शिव भक्त सावन मास में भगवान शंकर और पार्वती की पूजा एक साथ करते हैं तो उन्हे सौभाग्य का वरदान मिलता हैं। ऐसे शिव भक्तो के जीवन में कभी आर्थिक कष्ट नहीं आते हैं।

नियमित रूप से पूजा करने से उनकी अनुकम्पा और शादीशुदा जिन्दगी में खुशहाली बनी रहती हैं।अगर किसी व्यक्ति की शादी नहीं हो रही है और बार-बार रिश्ता जुड़कर टूट जाता है तो ऐसे लोगों को सावन के महीने में सोमवार का  व्रत जरूर करना चाहिए. भगवान शंकर और मां पार्वती की कृपा से भक्त की जल्दी ही शादी हो जाती है और इच्छानुरूप वर या वधु प्राप्त होते हैं.

व्रत एवं पूजा विधि

 सोमवार को व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर स्वच्छ जल से स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करके पूजा घर या मंदिर जाकर भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर या फिर शिव लिंग होगा, उसे स्वच्छ जल से धोकर साफ कर लें। फिर तांबे के लोटे या अन्य पात्र में जल भरकर उसमें गंगा जल मिला लें।

उसके बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करें और उनको सफेद फूल, अक्षत्, भांग, धतूरा, सफेद चंदन, धूप आदि अर्पित करें।  भगवान शिव को तुलसी का पत्ता, हल्दी और केतकी का फूल कदापि न अर्पित करें। इससे भगवान शिव अप्रसन्न हो जाते हैं। इसके बाद भगवान शिव के मंत्र ओम नम: शिवाय का जाप और शिव चालीसा का पाठ करें। इसके उपरान्त  आरती करें। दिनभर फलहार कर शाम को पूजा  आरती के पश्चात प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं।

सावन सोमवार व्रत के लाभ

सोमवार का व्रत शादीशुदा महिलाएं और पुरुष वैवाहिक जीवन में चल रही परेशानियों से छुटकारा पाया जाता है और  अविवाहि युवतियो को मनोवांक्षित वर मिलता हैं।  सावन में सोमवार का व्रत करने से व्यक्ति की  अकाल मृत्यु और दुर्घटना से मुक्ति मिलती हैं।                

एक समय की बात हैं श्री भूतनाथ    महादेव मृत्युलोक में विहार की इच्छा करके माता   पार्वती के साथ पधारे। विदर्भ देश के अमरावती सभी सुखों से परिपूर्ण थी वहां पधारे. वहां के राजा द्वारा एक अत्यंत सुन्दर शिव मंदिर था, जहां वे रहने लगे। माँ पार्वती को  एक बार  चौसर खलने की इच्छा हुई। तभी मंदिर में रहने वाले पुजारी से  माताजी ने पूछा कि इस बाज़ी में किसकी जीत होगी? तो ब्राह्मण ने कहा कि महादेव जी की। लेकिन पार्वती की जीत हो गई । तब ब्राह्मण को उन्होंने झूठ बोलने के अपराध में कोढ़ी होने का श्राप दिया।

कई दिनों के पश्चात देवलोक की अपसराएं, उस मंदिर में पधारीं और उसे देखकर कारण पूछा. पुजारी ने निःसंकोच सब बताया। तब अप्सराओं ने ढाढस बंधाया और सोलह सोमवार  के व्रत्र रखने को कहा। विधि पूछने पर उन्होंने विधि भी  बतायी और कहा कि इससे शिवजी की कृपा से सारे मनोरथ पूर्ण हो जाएंगे। फ़िर अप्सराएं स्वर्ग को चलीं गयीं। ब्राह्मण ने सोमवारों का व्रत कर के रोगमुक्त होकर जीवन व्यतीत करने लगा।

कुछ दिन उपरांत शिव पार्वती जी के  साथ पधारने तो  पार्वती जी ने उसे रोगमुक्त होने का करण पूछा. तब ब्राह्मण ने सारी कथा बतायी. तब पार्वती जी ने भी यही व्रत किया और उनकी मनोकामना पूर्ण हुई। तभी से सावन मास में भगवान शिन का व्रत ,पूजा पाठ किया जाता हैं।

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