जब लोकतंत्र के प्रहरियों की हुई संदिगध अवस्था में मौत तो, लोकतंत्र की बागड़ौर किसके हाथ..? 

Wednesday, 13 Jun 2018 12:27:41 PM
जब लोकतंत्र के प्रहरियों की हुई संदिगध अवस्था में मौत तो, लोकतंत्र की बागड़ौर किसके हाथ..? 
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क्राइम डेस्क। पत्रकार लोकतंत्र का अहम हिस्सा है, जिसने समय-समय पर खुद को साबित किया है। निष्पक्ष पत्रकारिता ने कई बार पत्रकारों को मुसिबत में डाला है। हाल ही में कुछ सालों से पत्रकारों पर हमलों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है जिसने लोकतंत्र को खतरे में डाला है। ऐसे में जब जनता की आवाज को उठानें वालों की अवाजें इस प्रकार दबाई जा रही हो तो पत्रकारिता के क्षेत्र में दहशत का माहोल बनना लाजमी हैं। 

भारतीय लोकतंत्र के मुख्य रूप से तीन स्तम्भ हैं, पहली न्यायपालिका, दूसरी कार्यपालिका, तीसरी विधायिका लेकिन पत्रकारिता को चौथे स्तम्भ के रूप में मनोनित किया गया है। चौथा स्तम्भ होनें के बावजूद पत्रकारों पर बढ़तें हमलें लोकतंत्र को कमजोर करनें में लगें है, ऐसें में लोकतंत्र की बागडौर किसके हाथ हो?.. ये सवाल पत्रकारों की हत्याओं से ही जुड़ा हुआ है। 

अब तक हुई पत्रकारों की हत्याओं की बात करें तो पिछलें 8 सालों में 2010 के बाद करीब 15 पत्रकारों की हत्या हुई है जिनमें से ज्यादातर के हत्यारों का भी पता नहीं चल पाया है। लेकिन इतना सब होने के बाद भी सरकारें पत्रकारों की सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं हुई है जो कही ना कही लोकतंत्र की कमजोरी जाहिर करता है। 5 सितम्बर 2017 को गौरी लंकेश की लाश बैंगलोर स्थित उनके घर के दरवाजे पर खुन से लथपत मिली। हमलावरों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी जिसमें उनके सिर और छाती में गोली लगने से उनकी मौत हुई थी। जिसके बाद देश में लंकेश को न्याय दिलाने के लिए काफी हंगामा भी हुआ था। उनकी हत्या हाल के वर्षों में स्पष्ट धर्मनिरपेक्षतावादियों या तर्कवादियों की कई हत्याओं का पालन करती है, जिसमें विद्वान मल्लेशप्पा कालबर्गी, विरोधी अंधविश्वास कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर और लेखक-राजनेता गोविंद पंसारे शामिल हैं। 

हाल ही में 25 मार्च को नविन निश्चल जो की दैनिक भास्कर में बिहार से पत्रकार थे, उनकी भी एक रोड़ एक्सीडेंट में हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने एसयूवी के चालक मोहम्मद हरसु (बिहार के पूर्वी राज्य के गांव के प्रमुख) को गिरफ्तार कर लिया था। निश्चल के अलावा पिछले तीन सालो में हुई हत्याएं-13 फरवरी 2016 करुण मिश्रा, 13 मई 2016 राजदेव रंजन, 23 अगस्त 2016 किशोर डेव, 5 सितंबर 2017 गौरी लंकेश, 21 सितंबर 2017 संतानु भौमिक, 21 नवंबर 2017 सुदीप दत्ता भौमिक।

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