एक क्लिक में पढ़ें देश, विदेश, सिनेमा और खेल जगत सहित 5 बड़ी खबरें

Wednesday, 13 Jun 2018 03:52:31 PM
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जब लोकतंत्र के प्रहरियों की हुई संदिगध अवस्था में मौत तो, लोकतंत्र की बागड़ौर किसके हाथ..? 

जब लोकतंत्र के प्रहरियों की हुई संदिगध अवस्था में मौत तो, लोकतंत्र की बागड़ौर किसके हाथ..? 

क्राइम डेस्क। पत्रकार लोकतंत्र का अहम हिस्सा है, जिसने समय-समय पर खुद को साबित किया है। निष्पक्ष पत्रकारिता ने कई बार पत्रकारों को मुसिबत में डाला है। हाल ही में कुछ सालों से पत्रकारों पर हमलों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है जिसने लोकतंत्र को खतरे में डाला है। ऐसे में जब जनता की आवाज को उठानें वालों की अवाजें इस प्रकार दबाई जा रही हो तो पत्रकारिता के क्षेत्र में दहशत का माहोल बनना लाजमी हैं। 

भारतीय लोकतंत्र के मुख्य रूप से तीन स्तम्भ हैं, पहली न्यायपालिका, दूसरी कार्यपालिका, तीसरी विधायिका लेकिन पत्रकारिता को चौथे स्तम्भ के रूप में मनोनित किया गया है। चौथा स्तम्भ होनें के बावजूद पत्रकारों पर बढ़तें हमलें लोकतंत्र को कमजोर करनें में लगें है, ऐसें में लोकतंत्र की बागडौर किसके हाथ हो?.. ये सवाल पत्रकारों की हत्याओं से ही जुड़ा हुआ है। 

अब तक हुई पत्रकारों की हत्याओं की बात करें तो पिछलें 8 सालों में 2010 के बाद करीब 15 पत्रकारों की हत्या हुई है जिनमें से ज्यादातर के हत्यारों का भी पता नहीं चल पाया है। लेकिन इतना सब होने के बाद भी सरकारें पत्रकारों की सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं हुई है जो कही ना कही लोकतंत्र की कमजोरी जाहिर करता है। 5 सितम्बर 2017 को गौरी लंकेश की लाश बैंगलोर स्थित उनके घर के दरवाजे पर खुन से लथपत मिली। हमलावरों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी जिसमें उनके सिर और छाती में गोली लगने से उनकी मौत हुई थी। जिसके बाद देश में लंकेश को न्याय दिलाने के लिए काफी हंगामा भी हुआ था। उनकी हत्या हाल के वर्षों में स्पष्ट धर्मनिरपेक्षतावादियों या तर्कवादियों की कई हत्याओं का पालन करती है, जिसमें विद्वान मल्लेशप्पा कालबर्गी, विरोधी अंधविश्वास कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर और लेखक-राजनेता गोविंद पंसारे शामिल हैं। 

हाल ही में 25 मार्च को नविन निश्चल जो की दैनिक भास्कर में बिहार से पत्रकार थे, उनकी भी एक रोड़ एक्सीडेंट में हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने एसयूवी के चालक मोहम्मद हरसु (बिहार के पूर्वी राज्य के गांव के प्रमुख) को गिरफ्तार कर लिया था। निश्चल के अलावा पिछले तीन सालो में हुई हत्याएं-13 फरवरी 2016 करुण मिश्रा, 13 मई 2016 राजदेव रंजन, 23 अगस्त 2016 किशोर डेव, 5 सितंबर 2017 गौरी लंकेश, 21 सितंबर 2017 संतानु भौमिक, 21 नवंबर 2017 सुदीप दत्ता भौमिक।

अमेरिका देगा किम जोंग को सुरक्षा तो किम ने किया परमाणु निरस्त्रीकरण का वादा

अमेरिका देगा किम जोंग को सुरक्षा तो किम ने किया परमाणु निरस्त्रीकरण का वादा

इंटरनेट डेस्क:  उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग ने अपनी सुरक्षा को लेकर अमेरिका से सुरक्षा करने का वादा करने के लिए कहा और इसके बदले में किम ने पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण का वादा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई किम की ये ऐतिहासिक शिखर वार्ता को लगभग सफल बताया गया है। इसके समझौते के बाद एशिया क्षेत्र परमाणु का खतरा कम हो सकता है।इन दोनों नेताओं के बिच लगभग चार घंटे तक चली बातचीत हुई इसके बाद ट्रंप ने कहा कि किम ने परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए वादा किया है की वह मिसाइल इंजन का एक परीक्षण स्थल नष्ट करने को तैयार है। ट्रंप को किम के परमाणु निरस्त्रीकरण के समझौते को लेकर उन्हें पुरा विश्वास है। 

ट्रंप ने ऐतिहासिक शिखर वार्ता के बाद संवाददाताओं से कहा कि दोनों देशों के बीच एक नया अध्याय लिखने के लिए तैयार हैं और ट्रंप ने घोषणा कि वह दक्षिण कोरिया में किए जा रहे अमेरिकी सैन्य अभ्यास रोक दिया जाएगा। अमेरिकी सेना के कमांडर ने संवाददाताओं से कहा कि वह अभ्यास रोकने पर सहमत हुए क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा करने से कई देशों के साथ मित्रता बढ़ती है। ट्रंप ने कहा की दोनों देशों ने मिलकर एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए जो उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की बात पर हमेशा प्रतिबद्धता है। इसके बाद किम उत्तर कोरिया को अलग थलग पड़े देश से विश्व के अन्य देशों के साथ जुड़ने के लिए काम करेगा। 

परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए वह जल्दी प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं और आने वाले समय में विश्व के बहुत बड़ा बदलाव देखेगी। कुछ समय पहले तो इस बात पर विश्वास नहीं था की किम के साथ इतना अच्छा रिश्ता बन जाएगा। लेकिन आज दोनों ने मिलकर सबसे बड़ी समस्या को हल कर दिया है और आने वाले समय हम दोनों मिलते रहेंगे। ट्रंप ने कहा कि वह किम को व्हाइट हाउस में आने के लिए आमंत्रित करेंगे और एक निश्चित समय पर उत्तर कोरिया का दौरा भी करेंगे। 

रिलीज होने से पहले 'रेस 3' ने तोड़ दिए कमाई के सारे रिकॉर्ड 

रिलीज होने से पहले 'रेस 3' ने तोड़ दिए कमाई के सारे रिकॉर्ड 

बॉलीवुड डेस्‍क: बॉलीवुड के दबंग खान यानी सलमान खान की इस ईद पर रिलीज होने वाली 'रेस 3' ने पर्दे पर उतरने से पहले ही कमाई के ​नए रिकॉर्ड बनाने शुरू कर दिए है। इस फिल्म के सभी कलाकर  फिल्म को हिट बनाने के​ लिए जमकर प्रमोशन करने में लगे हुए है। इस फिल्म टिजर हो या गाने सब ने धूम मचा रखी है। लेकिन इस फिल्म ने रिलीज से पहले ही कमाई के नए रिकॉर्ड बनाने में लग गई है और सलमान खान की हर फिल्म 200 से 300 करोड़ के क्लब को आसानी से पार कर लेती है। इस बार भी लोगों को कहना है की ये फिल्म कमाई के नए रिकॉर्ड बनाने में सफल हो सकती है।

फिल्म 'रेस 3' का निर्माण सलमान खान और रमेश तौरानी ने मिलकर लगभग 100 करोड़ के बजट में इस फिल्म को बनाया है। लेकिन इस फिल्म के सैटेलाइट राइट्स लगभग 130 करोड़ रुपये में बेचकर 30 करोड़ रुपये का मुनाफा कमा लिया है। अगर इस फिल्म के सैटेलाइट राइट्स 130 करोड़ रूपए में बेचे गए है तो इस फिल्म ने आमिर खान की फिल्म 'दंगल' का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 'दंगल' के राइट्स 110 करोड़ रुपये में बेचे गए थे और रेस 3 के 130 करोड़ तो इस हिसाब से इस फिल्म ने एक नया रिकॉर्ड बना लिया है। 'रेस 3' 15 जून को ईद के मौके पर रिलीज होगी और इस फिल्म में सलमान के साथ बॉबी देओल, डेज़ी शाह, अनिल कपूर, जैकलीन फर्नांडीज़ और फ्रेड्डी दारुवाला नजर आएंगे।

2017 में सलमान खान की फिल्म टाइगर जिंदा है ने दुनियाभर में 423.59 करोड़ की कमाई करके कई रिकॉर्ड बना चुकी है। सलमान खान की फिल्म सुल्तान ने दुनियाभर में 585 करोड़ रुपये की कमाई की है। सलमान खान की फिल्म बजरंगी भाईजान ने दुनियाभर में 629 करोड़ से ज्यादा की कमाई करने में कामयाब रही है। अब यह देखना होगी की रेस 3 दुनियाभर में कितनी कमाई कर सकती है।

संजू सैमसन के करियर के लिए खतरा साबित हो सकता है ये टेस्ट

संजू सैमसन के करियर के लिए खतरा साबित हो सकता है ये टेस्ट

स्पोर्ट्स डेस्क। आईपीएल के इस सीजन में भारतीय कई खिलाड़ी चमक उठे और इस खेल ने कई खिलाडियों का करियर बना दिया। आईपीएल के खत्म होते ही भारतीय टीम में कई नये चेहरे शामिल हुए। और ऐसा ही एक खिलाड़ी हाल ही में टीम इंडिया ए में शामिल किया गया है। आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के शानदार युवा बल्लेबाज संजू सैमसन को आगामी इंग्लैंड ए और वेस्टइंडीज ए दौरे के लिए टीम इंडिया में शामिल किया गया है लेकिन उनके लिए एक खतरा सामने आ गया है। जिसकी वजह से वह मुकाबले से बाहर हो गए है।

रिपोर्ट के अनुसार बताया जा रहा है की बल्लेबाज संजू सैमसन को आगामी इंग्लैंड ए और वेस्टइंडीज ए दौरे के लिए टीम इंडिया में शामिल तो कर लिया गया था लेकिन एक यो यो टेस्ट को पास नहीं करने के कारण उनको टीम इंडिया से बाहर बैठना पड़ा है और साथ ही बताया गया है की इस सीरिज में उनकी जगह ईशान किशन को टीम इंडिया में शामिल किया गया है। अब देखना होगा की उनके यो यो टेस्ट को पास नहीं करने के कारण क्या उनके करियर में कुछ बदलाव आ सकते है क्योंकि इस टेस्ट की वजह से पहले भी कई खिलाडियों का करियर खराब हो चूका है।

बताया जा रहा है की यो यो टेस्ट की वजह से पहले भी कई खिलाडियों के हाथों निराशा लग चुकी है।  अगस्त 2017 में श्रीलंका दौरे के लिए वनडे सीरीज के लिए जब खिलाडियों का ऐलान हुआ तो उस समय  शानदार फॉर्म में चल रहे युवराज सिंह और सुरेश रैना को भी 'यो-यो' पास न कर पाने के चलते टीम से बाहर का रास्ता देखना पड़ा था। साथ बताया जा रहा है की भारतीय टीम के मुख्य कोच रवि शास्त्री ने यो यो टेस्ट के बारे में कहा है कि फिटनेस टेस्ट अनिवार्य है, और जो लोग आवश्यक स्कोर प्राप्त नहीं करते हैं उन्हें राष्ट्रीय चयन के लिए नहीं माना जाएगा।

FIFA WC 2018: ये दिग्‍गज फुटबाल खिलाडी हो चुके हैं डोपिंग और ड्रग्स के शिकार, खुफिया एजेंसियों की रहेगी पैनी नजर

FIFA WC 2018: ये दिग्‍गज फुटबाल खिलाडी हो चुके हैं डोपिंग और ड्रग्स के शिकार, खुफिया एजेंसियों की रहेगी पैनी नजर

स्‍पोर्टस डेस्‍क। फुटबाल का महाकुंभ इस बार रूस में हो रहा हैं और रूस में ज्‍यादातर खिलाडी ड्रग्स और डोपिंग के शिकार होते आयें हैं। खेलों में भाग लेने वाले खिलाडीयों को मैच के दौरान नशे का सेवन करने पर पाबंदी हैं इसीलिए इस बार नशे के इस गंदे खेल को रोकने के लिए रूस में वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी पूरी तरह मुस्‍तैद हो चुकी हैं। इस बार रूस में आयोजित हो रहे इन खेलों में तकरिबन 5 खुफियां एजेंसियों की नजर फुटबाल के उन खिलाडीयों पर रहेगी जो ड्रग्स और डोपिंग की वजह से शक के दायरें में बने हुए हैं। दरअसल फुटबाल के इस महाकुंभ में पहली बार इस तरह की खुफिया एजेंसियों को शामिल किया जा रहा हैं। सूत्रों के अनुसार रूस एक ऐसा देश हैं जो खेलों के मामले में ड्रग्स और डोपिंग की वजह से सुर्खियों में बना रहता हैं। इन खेलों में एहतियात के तौर पर वर्ल्ड कप के क्वालीफायर मुकाबले से पहले ही 5432 खिलाडि़यों के नमूने लिए जा चुके हैं।

किस तरह होगी जांच

फुटबाल के इस महाकुंभ में डोपिंग और ड्रग्स को रोकने के लिए अत्‍याधुनिक तरीके से जांच की जा रही हैं। इस बार इन खेलों में बायो मार्कर परीक्षण से खिलाडीयों की जांच की जा रही हैं। इस परिक्षण से सिंथेटिक एचजीएस और ह्यूमेन ग्रोथ हार्मोन में अंतर खोजा जायेगा। अगर इस परिक्षण में कोई खिलाडी पकडा जाता हैं तो उसके खिलाफ सख्‍त एक्‍शन लेते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। फुटबाल के खेलों में कई खिलाडी ड्रग्‍स और डोपिंग की वजह से फंस चुके हैं और बावजुद इसके अभी भी कई खिलाडीयों की भूमिका नशे के सेवन में संधिग्‍ध बताई जा रही हैं। नशे की लत रखने वाले इन खिलाडियों की वजह से खेल पर गलत प्रभाव पडता हैं और खेल की भावना आहत होती हैं।

ये खिलाडी हो चुके हैं डोपिंग और ड्रग्‍स के शिकार:

डिएगो माराडोना (अर्जेंटीना):

अर्जेंटीना का यह दिग्‍गज खिलाडी अब तक दो बार ड्रग्स लेने के मामले में पकडा जा चुका हैं। इस खिलाडी का नाम सामने आते ही फुटबाल खिलाडीयों और दर्शकों में हडकंप मच गया था। इस खिलाडी पर दोनो बार प्रतिबंध लगाया गया था। वर्ष 1991 मे 15 महिने का बैन लगने के बावजूद 1994 वर्ल्ड के दौरान ये खिलाडी फिर से पकडा गया जिस पर दोबार प्रतिबंध लगा।

जेराड किनसेला (इंग्लैंड):

जेराड किनसेला इंग्लैंड के सबसे दिग्‍गज खिलाडीयों में शुमार हैं। ये खिलाडी वर्ष 2013 में ड्रग्स के सेवन में दोषी पाया गया। इस खिलाडी की जांच में इनके खून में एननाबोलिक स्टेरायड की मात्रा पाई गई। इस मामले में इनके खिलाफ कडी कार्रवाई हुई और इन पर तीन साल का प्रतिबंध लगाया गया।

एड्रियन मुतु (रोमानिया):

एड्रियन मुतु को रोमानिया का धाकड खिलाडी माना जाता हैं। इस मामले की जांच में पता चला हैं कि ये जो दवा पी रहें हैं वो ताकत बढाने की दवा हैं। वर्ष 2013 में इस खिलाडी के दोषी पाये जाने पर इन पर भारी जुर्माने के साथ सात माह का प्रतिबंध लगा।

एडगर डेविड्स (हॉलैंड):

हॉलैंड के एडगर डेविड्स के लाखो की तादाद में फैंस हैं। ये एक स्‍टाइलिश खिलाडी हैं। वर्ष 2001 में ये प्रतिबंधित दवाओं का सेवन करने के दोषी पाये गयें और इन पर 16 माह का बैन लगा।

जर्मेनी ह्यू (जमैका):

जर्मेनी ह्यू जमैका को फुटबाल के दिग्‍गज खिलाडीयों में गिना जाता हैं। वर्ष 2014 में ये खिलाडी प्रतिबंधित दवाओं के सेवन का दोषी पाया गया जिसके बाद इन पर कुल नौ महिने का बैन लगाया गया।

फुटबाल के खेल में इन खिलाडीयों के अलावा भी नशे का सेवन करने वाले कई ऐसे खिलाडीयों के नाम शामिल हैं जिनके बारें में सुनकर विश्‍वास करना नामुमकिन हैं। इन सभी खिलाडियों पर जुर्माना और प्रतिबंध लग चुका हैं मगर आज भी इस खेल पर डोपिंग का साया मंडरा रहा हैं।

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