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नीतीश कुमार के शासन में गायब हो गए सरकारी कार्यालय, सरकार तलाश में जुटी

Monday, 14 Oct 2019 10:26:43 AM

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नीतीश कुमार तो जादूगर हैं ही. रातोंरात पाला बदल कर सरकार बदल डालते हैं. उनके सरकारी मुलाजिम भी बड़े जादूगर हैं. उनकी जादूगरी का ही कमाल है कि बिहार में सरकार के 34 कार्यालय गायब हो गए. बरसों से गायब हैं लेकिन न हुक्मरानों को पता चला न हाकिमों को. पैसा आता रहा, लूट होती रही, नीतीश कुमार भाषणों में प्रवचन देते रहे हम करप्शन से कोई समझौता नहीं करेंगे. करप्शन पर जीरो टॉलरेंस की हमारी नीति है. उनकी जीरो टॉलरेंस नीति अब उनका ही मुंह चिढ़ा रहा है.बिहार में एक अजब तरह का घोटाला सामने आया है. नीतीश कुमार के शासनकाल में घोटाले भी तरह-तरह के होने लगे हैं.

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नया घोटाला कार्यालय घोटाला है. बिहार में कई सरकारी कार्यालय कागजों पर तो हैं लेकिन उनका वजूद ही नहीं है. बिहार का एक जिला है सुपौल. इस जिले में 34 सरकारी कार्यालय गायब हो गए हैं, लेकिन इसका पता न तो सरकार को है और न बाबुओं को. सरकारी बाबू जिनपर इन कार्यालयों को चलाने की जिम्मेदारी है, वे सालों से अनजान बने हैं. मामला ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यालय खोलने का है. इसमें सबसे खास बात यह कि इन लापता कार्यालयों के लिए कोषागार से हर महीने लाखों रुपए की निकासी भी हो रही है. अब मामला उजागर होने के बाद सरकार इन कार्यालयों को ढूंढने में लगी है. साथ ही दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की कवायद भी कर रही है.

बिहार सरकार ने एक संकल्प के माध्यम से सात मार्च 2012 को निर्णय लेकर बिहार में कार्य बेहतरी के तहत नए कार्यालय खोलने का निर्णय लिया था. जिसके तहत जिले के तीन कार्यप्रमंडल,11 अवर प्रमंडल और 23 कार्य प्रशाखा खोलने का निर्णय लिया था और सचिव ने आदेश जारी किए थे. इन कार्यालयों को पहली अप्रैल 2012 से ही अस्तित्व में आ जाना था. साथ ही सभी अभियंता को अपने अधीन कार्य संपादन करना था. उन्हें वेतन भी संबंधित इलाके के कोषागार से मिलना था. लेकिन अधिकारियों ने इस आदेश का तोड़ निकालते हुए तीन कार्यप्रमंडल, वीरपुर, सुपौल ,त्रिवेणीगंज में खोल दिया, लेकिन 11 कार्य अवर प्रमंडल और 23 कार्य प्रशाखा सात साल बाद भी लापता है. इस मामले का पता आरटीआई कार्यकर्ता और भ्रष्टाचार जागरूकता अभियान से जुड़े अनिल कुमार सिंह ने सूचना के अधिकार से चलाया है.

सरकारी आदेश के मुताबिक छातापुर, त्रिवेणीगंज और सुपौल प्रखंड में तीन-तीन, किशनपुर, मरौना, बसंतपुर, राघोपुर, भपटियाही व पिपरा में दो-दो और प्रतापगंज व निर्मली में एक-एक कार्य प्रशाखा कार्यालय खुलना था. लेकिन एक भी नहीं खुला. लेकिन सरकारी खजाने से इस कार्यालय के नाम पर रकम खर्च हो रही है. बिहार सरकार ग्रामीण कार्य विभाग ने संकल्प संख्या 4303 दिनांक 7 मार्च, 2012 के माध्यम से ग्रामीण कार्य विभाग का पुनर्गठन वउसके अधीन कार्यरत कार्य अंचल,प्रमंडल ,अवर प्रमंडल और प्रशाखा के बीच भौगोलिक रूप से कार्यक्षेत्र का बंटवारा करने का आदेश जारी किया था.आदेश में स्पष्ट है कि सभी नवसृजित कार्यालय पहली अप्रैल, 2012 से अस्तित्व में आ जाएंगे और अपने कार्यक्षेत्र के अधीन सभी कार्यो का संपादन उन कार्यालयों के माध्यम से होगा. 

जारी संकल्प में जिले में तीन कार्यप्रमंडल,11 कार्य अवर प्रमंडल और 23 कार्य प्रशाखा खोलना था. आरटीआई कार्यकर्ता सह भ्रष्टाचार मुक्त जागरूकता अभियान सुपौल के अनिल कुमार सिंह ने जिला लोकशिकायत निवारण पदाधिकारी के समक्ष परिवाद दायर कर सात साल से लापता कार्यालय को खोजने और इसमें संलिप्त दोषी पदाधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है. जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने परिवाद दर्ज कर सुनवाई शुरू कर दी है. जिससे संबंधित अधिकारियों में हड़कंप मच गया है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).

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